न्याय की चौखट पर विधवा माँ का रुदन सोनभद्र में गवाहों को पिता की तरह मार डालने की खुली धमकी प्रशासन की अनदेखी पर गंभीर सवाल

 ख़तरे में न्याय! योगीराज में नहीं हो रही सुनवाई, न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने का संगठित आपराधिक षड्यंत्र

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सोनभद्र/रेणुकूट। सोनभद्र जिले में कानून और व्यवस्था को सीधे चुनौती देते हुए न्याय की प्रक्रिया पर हमला किया गया है। रेणुकूट में, एक गंभीर मुकदमे के मुख्य गवाहों के सामने ही अभय प्रताप सिंह, पुत्र स्वर्गीय शिव प्रताप सिंह (बबलू सिंह) पर जानलेवा हमला किया गया, जिसके बाद उन्हें तुम्हारे पिता की तरह हत्या कर देंगे की खुली धमकी दी गई। इस पूरे प्रकरण में सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि पीड़ित की विधवा माँ अपने परिवार की सुरक्षा के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं, और उनका सीधा आरोप है कि योगीराज में प्रशासन पीड़ित की सुनवाई नहीं कर रहा है। यह सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र दिनांक 04 दिसंबर 2025 की रात को चुर्क स्थित विकास बैंक्वेट के बाहर रचा गया।
 
पीड़ित अभय प्रताप सिंह अपने चार मुख्य गवाहों गणेश तिवारी, किशन सिंह, दिलीप बागले, और सत्या सिंह के साथ एक विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। गाड़ी से उतरते ही, अनिल सिंह, बृजेश सिंह, शानू सिंह, रुद्र प्रताप सिंह, अखिल यादव सहित लगभग पांच अन्य लोगों ने अभय प्रताप सिंह को अचानक घेर लिया। हमलावरों ने तुरंत गवाहों के सामने अभय प्रताप सिंह को लक्षित करते हुए चिल्लाकर धमकी दी जैसे तुम्हारे पिता की हत्या की गई थी, वैसे ही तुम्हारी भी हत्या कर देंगे, साले मुकदमे की पैरवी बंद कर दो। यह बयान स्पष्ट रूप से हत्या की धमकी है और दर्शाता है कि हमलावरों का मुख्य उद्देश्य गवाहों को डराकर और पीड़ित को खत्म करके न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह से बाधित करना है।
 
धमकी के तत्काल बाद हिंसा हुई। अनिल सिंह के उकसाने पर, बृजेश सिंह ने अभय प्रताप सिंह के चेहरे पर कड़े से जोरदार प्रहार किया। जबकि शानू सिंह, अखिल यादव और रुद्र प्रताप सिंह ने पीड़ित के हाथ पकड़े रखे। प्रहार इतना घातक था कि अभय प्रताप सिंह मौके पर ही अचेत होकर गिर पड़े, और उनके चेहरे से अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी मौके से फरार हो गए। पीड़ित अभय प्रताप सिंह ने रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में शिकायत दर्ज कराते हुए अपनी जान को वास्तविक खतरा बताया है, क्योंकि यह हमला पूर्व की एक गंभीर घटना (पिता की हत्या) से जुड़ा है।
 
पीड़ित की माँ, एक प्रताड़ित विधवा, ने न्याय की गुहार लगाते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए विधवा माँ का पक्ष ने बयान में कहा मैंने पूर्व में भी अपनी जान को खतरे की लिखित सूचना प्रशासन को दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। यह हमला साबित करता है कि अपराधी बेखौफ हैं। मेरे परिवार और मेरे बच्चों की सुरक्षा खतरे में है, और हमें दर-दर चौखट काटनी पड़ रही है। हम योगीराज में हैं, फिर भी प्रशासन पीड़ित की सुनवाई क्यों नहीं कर रहा है? अभय प्रताप सिंह ने प्रशासन से कठोर अपेक्षा व्यक्त की है कि आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता (IPC) की गंभीर धाराओं के अंतर्गत तत्काल, प्रभावी और कठोर कार्रवाई की जाए।
 
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, क्षेत्र के नागरिकों और न्यायविदों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस घटना को केवल मारपीट के तौर पर न देखा जाए, बल्कि इसे गवाहों को धमकाने और न्यायिक प्रक्रिया को बाधित करने के एक संगठित आपराधिक षड्यंत्र के तौर पर तुरंत दर्ज किया जाए। पुलिस प्रशासन का आधिकारिक बयान और उनकी कार्रवाई की गति अब सवालों के घेरे में है। अभय प्रताप सिंह और उनके गवाहों की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि न्यायपालिका पर लोगों का विश्वास बना रहे।

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