शक्तिनगर एसएचओ के विरुद्ध मुकदमा दाखिल , कोर्ट ने 13 जून को शक्तिनगर थाने से आख्या मांगा

- सोसंवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल यादव द्वारा भेजे गए स्पीड पोस्ट को एसएचओ शक्तिनगर द्वारा लेने से इनकार करते हुए वापस लौटाने का मामला

अजित सिंह / राजेश तिवारी Picture
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शक्तिनगर थाना क्षेत्र का मामला

राजेश तिवारी ( क्राइम ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश-

 सोनांचल संघर्ष वाहिनी(सोसंवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रोशन लाल यादव ने बुधवार को शक्तिनगर एसएचओ कुमुद शेखर सिंह के विरुद्ध सीजेएम कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया है। कोर्ट ने शक्तिनगर थाने से 13 जून को आख्या तलब किया है।

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सोनांचल संघर्ष वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट रोशनलाल यादव ने अधिवक्ता गयानाथ मौर्य के जरिए कोर्ट में दाखिल प्रार्थना पत्र में अवगत कराया है कि लोक सेवक होकर भी शक्तिनगर एसएचओ कुमुद शेखर सिंह ने स्पीड पोस्ट को लेने से इनकार करते हुए 30 अप्रैल को वापस लौटा दिया। जिससे साफ जाहिर हो रहा है कि निजी कंपनी कलिंगा से साठ गांठ कर सुविधा शुल्क लेकर भर्ती कराने में शामिल शक्तिनगर एसएचओ ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया है।

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एनसीएल खड़िया परियोजना में काम कर रही निजी कंपनी कलिंगा द्वारा एक हजार के ऊपर संविदा हेलफर और ड्राइवरों की भर्ती में संगठित संरक्षण प्राप्त तथा कथित गिरोह के द्वारा यहां के विस्थापित, प्रभावित और लोकल बेरोजगारों की भर्ती के नाम पर धड़ल्ले से युवाओं का दोहन किया जा रहा है, जबकि भर्ती की स्पष्ट गाइड लाइन बनाकर एक हजार में 80% विस्थापित, प्रभावित और लोकल बेरोजगारों की भर्ती होनी चाहिए।

एनआईटी के समझौते के आधार पर एनसीएल मुख्यालय सिंगरौली के चीफ जनरल मैनेजर द्वारा 10 जुलाई 2006 को स्पष्ट आदेश पारित किया गया है कि संविदा की समस्त भर्ती की 80 प्रतिशत विस्थापित, प्रभावित व लोकल बेरोजगारों की ही भर्ती सुनिश्चित हो। बावजूद इसके आदेश की अनदेखी कर चंद संगठित लोगों व एनसीएल खड़िया प्रबंधन की मिलीभगत से बाहरी लोगों की भर्ती सुविधा शुल्क लेकर बेरोकटोक की जा रही है।

इस अनियमितता के खिलाफ 22 अप्रैल को मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, कोयला मंत्री भारत सरकार समेत 8 उच्चाधिकारियों को स्पीड पोस्ट के जरिए शिकायती पत्र भेजा गया था, लेकिन शक्तिनगर एसएचओ ने स्पीड पोस्ट लेने से इनकार करते हुए वापस कर दिया। जबकि 30 अप्रैल को निजी कंपनी कलिंगा के विरूद्ध पदयात्रा निकाल कर जीएम को ज्ञापन देना था।एक जिम्मेदार लोकसेवक होते हुए भी शक्तिनगर एसएचओ ने अपने कर्तव्य का निर्वहन नहीं किया।

बल्कि उल्टा ही फोन करके वापस किए गए पत्र को एसएचओ द्वारा मांग किया गया। तथा कहा कि इसी में भलाई है। अनाब सनाब भी कहा। इसकी शिकायत एसपी सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से शिकायती पत्र भेजकर किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। तब मजबूर होकर कोर्ट में धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। अधिवक्ता ने शक्तिनगर एसएचओ के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की मांग किया। कोर्ट ने 13 जून को शक्तिनगर थाने से आख्या तलब किया है।

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