आंदोलन की राह पर आंगनबाड़ी वर्कर्स

आंदोलन की राह पर आंगनबाड़ी वर्कर्स।

‌सरकार पर लगाया अमानवीयता का आरोप।

‌बिना किसी फंड व पेंशन के सेवामुक्त करने से आक्रोशित हैं कार्यकर्ता।

‌ दया शंकर त्रिपाठी

‌स्वतंत्र प्रभात।

‌प्रयागराज-अपने सुखमय जीवन के लिए सरकार से कुछ अच्छा मिलने की उम्मीद लगाए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं पर सरकार का ऐसा फरमान जारी हुआ की उनकी नींद उड़ गई है। 62 वर्ष की आयु सीमा पूर्ण होने पर बिना किसी पेंशन व एकमुश्त देय धनराशि के आंगनबाड़ी कार्यकत्री, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्री एवं सहायिकाओं को सेवा मुक्त करने का फरमान सुन कार्यकर्ता अपने बुढ़ापे को लेकर आशंकित हैं।

‌वर्षो से सरकार की जनहित योजनाओं को धरातल पर मूर्त रूप देने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सरकार के इस फरमान से अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश शासन में विशेष सचिव गरिमा यादव ने 4 सितंबर 2012 में जारी शासनादेश का हवाला देते हुए जुलाई में एक पत्र दिया है। उनके अनुसार 62 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले आंगनबाड़ी वर्करों की सेवा समाप्त हो जाएगी।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उक्त शासनादेश जारी हुए लगभग 9 वर्ष का समय व्यतीत हो चुका हैं। परन्तु अचानक इस कोरोना वैश्विक महामारी में जब हमें सरकार की हमदर्दी व सहयोग की सबसे ज्यादा जरूरत थी तो वह संवेदनहीनता का परिचय देते हुए हम लोगों को भीख मांगने के लिए छोड़ दिया। कार्यकत्रियों ने बताया कि विभाग में 10 वर्ष से भी अधिक समय से भर्ती न होने तथा मृत्यु आदि कारणों से रिक्त केंद्रों का भार भी वही लोग उठा रही हैं ।

‌सरकार द्वारा मानदेय बढ़ोतरी, प्रमोशन एक छलावा

‌आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गीतांजली मौर्य ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्करों के साथ सरकार अमानवीय ब्यवहार कर उनका मानसिक शोषण कर रही है। वर्षो से सरकार ने मानदेय बढ़ोत्तरी,प्रमोशन का लालीपाप देकर कार्यकर्ताओं के साथ छल किया है। कोरोना काल में भी समय से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मानदेय तक नहीं मिल पा रहा है ।

‌अतिरिक्त कार्य से रहता रहता है मानसिक दबाव।

‌आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से अन्य विभागों का भी कार्य लिया जाता है नतीजतन विभागीय कार्यों की रिपोर्टिंग सही समय पर नहीं हो पाती है। वहीं एक ही रिपोर्ट बार- बार कई तरीके से मांगी जाती है जिसकी वजह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में दुविधा और असमंजस की स्थिति बनी रहती है। साथ ही कार्य के दबाव व अधिकारीयों की डांट से अवसाद में भी रहती हैं।

‌स्मार्ट फ़ोन के आभाव में प्रभावित होता है कार्य।

‌आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को सूचना संकलित करने के साथ ही अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए स्मार्ट फोन की आवश्यकता होती है। सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्टफोन उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान 2016 में ही सुनिश्चित किया गया था किंतु अब तक कुछ ही जनपदों में मोबाइल प्राप्त कराया गया है।

‌आंगनबाड़ी संगठन ने दी आंदोलन की चेतावनी

‌विभाग के तमाम अव्यवस्थाओं के बीच संघर्षरत तथा निष्ठा व इमानदारी से कार्य करने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस फरमान का बहिष्कार किया है। आंगनवाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन के मंडल संरक्षक संतोष मिश्र ने कहा कि संगठन ने निर्णय लिया है कि यदि 62 वर्ष पूर्ण कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बिना किसी फंड अथवा पेंशन के खाली हाथ जबरन सेवा मुक्त किया जाएगा तो विवश होकर संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी शासन- प्रशासन व सरकार की होगी।

‌ प्रयागराज ब्यूरो से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।