सचिन तिवारी हत्याकांड का 4 दिन बाद खुलासा ना होने पर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर किया धरना प्रदर्शन

सचिन तिवारी हत्याकांड का 4 दिन बाद खुलासा ना होने पर  आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर किया धरना प्रदर्शन

प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों ने लगाया मुर्दाबाद का नारा

अंबेडकर नगर।

महरुआ थाना क्षेत्र में सचिन उर्फ पुज्जू हत्याकांड में 4 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं हो सका खुलासा प्राप्त जानकारी के अनुसार करीब 1 दर्जन से अधिक लोगों को अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश मिश्रा एसओजी टीम सहित करीब आधा दर्जन टीमें इस हत्याकांड के खुलासे में जुटी हुई है l

 

लेकिन अभी तक किसी भी नतीजे पर महरुआ पुलिस और एसओजी सहित तमाम टीमें खुलासा करने में नाकाम ही रही हैं वही शनिवार को गांव की महिला समेत करीब सैकड़ों ग्रामीणो ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना प्रदर्शन करते हुए  लगातार पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

सचिन तिवारी हत्याकांड का 4 दिन बाद खुलासा ना होने पर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर किया धरना प्रदर्शन
आक्रोशित ग्रामीणो ने अपर पुलिस अधीक्षक और एडीएम अंबेडकरनगर को ज्ञापन देकर जल्द से जल्द खुलासा करने की मांग की है। वही महरुआ के जिस हल्के में हत्या हुई है उसी हल्के का एक सिपाही भी संदेह के घेरे में आ रहा है क्योंकि हत्या के 5 मिनट बाद ही घटनास्थल पर पहुंच चुका था और सूत्रों  से पता चला है कि इस घटना कांड में अगर इस पुलिस कि मोबाइल का लोकेशन निकाला जाए तो कहीं ना कहीं इस पुलिस की भी संलिप्तता सामने आ सकती है लेकिन पुलिस अपनी बचत जरूर करती है लेकिन दूसरे को गलत तरीके से फंसाने में मशगूल रहती है कहावत बड़ी ही पुरानी है लेकिन कभी ना कभी तो यह पुलिस वाला महरुआ थाना छोड़कर तो जाना ही पड़ेगा लेकिन जांच भी करनी पड़ेगी।
सचिन तिवारी हत्याकांड का 4 दिन बाद खुलासा ना होने पर ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर किया धरना प्रदर्शन
कुछ दलाल किस्म के लोग इसे बचाने में लगे हुए हैं जोकि तथाकथित पत्रकार भी शामिल हैं क्योंकि बार-बार इन पुलिस वालों का नाम लेने पर पत्रकार बिरादरी भड़क जा रही है और उसी बिरादरी के पत्रकार और पुलिस दोनों हैं दलाली ना चमक पाने के कारण एक पत्रकार को तो जान से मार देने की धमकी तक दे डाली लेकिन वह ऐसा पत्रकार है कि जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है फिर भी कलम रुकने वाली नहीं है वह चाहे जितने भी धमकी दे ले चाहे जितना भी गलत आरोप लगा ले।वह आरोपियों को बचा पाने में सफल नहीं हो पा रहा है इसलिए अंदर ही अंदर पत्रकार के लिए कुछ भी करने को तैयार है यहां तक की तहसील और ब्लॉक की दलाली करने में भी तनिक भी हिचकिचाहट इसे नहीं है वही हल्का सिपाही को बचाने के लिए बार-बार गलत तरीके से ग्रुपों पर गलत बयान बाजी करता रहता है।
सचिन हत्याकांड को लेकर एक तरफ जहां ब्राम्हण आक्रोशित हैं वहीं दूसरा पक्ष एक पक्ष को बचाने में जुटा हुआ है जब इस विषय पर अपर पुलिस अधीक्षक अवनीश कुमार मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इस मामले में किसी की पैरवी और दलाली नहीं चल पाएगी जो सही मुलजिम होगा उसे जेल जाना ही पड़ेगा क्योंकि इस मामले को खुद मुख्यमंत्री अपनी नजर से देख रहे हैं और ब्राम्हण हत्याकांड से काफी आक्रोशित भी हैं।

पुलिसिया थ्योरी नहीं आ रही है समझ में वही परिवार वालों का कहना है कि पुलिस की एक भी कहानी समझ में नहीं आ रही है इसलिए हम लोगों को आमरण अनशन और धरना प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है वहीं मृतक के भाई ने बताया कि असली मुलजिम गांव का ही है जिसे पुलिस बहुत ही इज्जत और सम्मान के साथ कुर्सी देकर बैठाने का काम कर रही है और भरपूर कोशिश बचाने में लगी हुई है। वहीं अगर सिपाही की चल और अचल संपत्ति की जांच कराई जाए तो उसकी कमाई से कई गुना ज्यादा पाया जा सकता है।ऐसी स्थिति में सरकार से मांग की गई है कि इसकी जांच जल्द से जल्द कराई जाए नहीं तो यह सिपाही और भी हत्या करवा सकता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हर दिन इसी एक मुर्गी फार्म पर दावत में रहता था और अपराधियों के साथ मिलकर संरक्षण देने का भी काम किया करता था जबकि उस मुर्गी फार्म से चरस अफीम इसमैक गाजा और असलहे की बिक्री की जाती थी जिसमें इस सिपाही की भूमिका संदेह के घेरे में रहती थी जबकि इसके पहले भी एक हत्याकांड में जेल जा चुका है लेकिन फिर भी ऊपर के अधिकारी इसे संरक्षण दे रखे हैं।