#विचारलेख
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चुनाव आते ही भाषा की मर्यादा का पतन क्यों?
Published On
By हर्षिता यादव
डॉ. मनमोहन प्रकाश, स्वतंत्र पत्रकारलोकतंत्र में चुनाव विचारों, नीतियों और नेतृत्व की परीक्षा का अवसर होते हैं। राजनीतिक दलों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनता के सामने विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दों...
काश! ‘जियो और जीने दो’ का भी आईपीओ आता!
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By Abhinav Shukla
जिस दुनिया में हर चीज का बाजार है, वहाँ काश इंसानियत, प्रेम, सहिष्णुता और दूसरों को जीने देने की भावना का भी कोई आईपीओ आता! लोग उसमें निवेश करते और बदले में एक ऐसी दुनिया पाते, जहाँ हर व्यक्ति अपने...

