रिश्तों की अहमियत

जिन्दगी की सबसे बड़ी विडंबना

जिन्दगी की सबसे बड़ी विडंबना शायद यही है कि हम जिस चीज को पाने के लिए पूरी उम्र दौड़ते हैं, उसे पा लेने के बाद भी जिन्दगी पूरी नहीं होती। किसी के पास पैसा है तो समय नहीं, किसी के...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

"जिंदगी कोई सिनेमा नहीं है"

हम अक्सर जिंदगी को फिल्मों की तरह जीने की कोशिश करते हैं। पर्दे पर हीरो को कितनी भी बड़ी चोट लगे, वह उठता है, कपड़े झाड़ता है और फिर कहता है “मैं झुकूंगा नहीं।” तालियां बजती हैं, संगीत बजता है...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय