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मलिहाबाद में ‘मलिहा पासी स्मृति द्वार’ को लेकर गहराया विवाद
सोशल मीडिया पर लगातार किए जा रहे भड़काऊ पोस्ट, माहौल तनावपूर्ण
मलिहाबाद (लखनऊ) - मलिहाबाद में विधायक जयदेवी कौशल द्वारा बनवाए गए मलिहा पासी स्मृति द्वार को लेकर शुरू हुआ विवाद अब धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता जा रहा है। यह मामला अब केवल एक स्मृति द्वार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील मुद्दा बन गया है। क्षेत्र में पासी समाज और अर्कवंशी समाज के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, अर्कवंशी समाज के कुछ लोगों का दावा है कि मलिहा राजा पासी समाज से नहीं बल्कि अर्कवंशी समुदाय से संबंधित थे। उनका कहना है कि स्मृति द्वार का नामकरण और इससे जुड़ी पहचान गलत तरीके से प्रस्तुत की गई है। वहीं, पासी समाज के लोगों ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे अपने समाज के इतिहास और सम्मान पर सीधा हमला बताया है। पासी समाज का कहना है कि मलिहा पासी उनके समाज के गौरव हैं और उनके नाम पर बने स्मृति द्वार से किसी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस विवाद ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब सोशल मीडिया पर कुछ फेसबुक अकाउंट्स—“क्षत्रिय एकता भारत” और “Nirala Desh Bharat”—से लगातार भड़काऊ पोस्ट और वीडियो वायरल होने लगे। इन पोस्ट्स में कथित तौर पर स्मृति द्वार को उखाड़ फेंकने की धमकी दी जा रही है, जिससे इलाके में डर और आक्रोश का माहौल बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की पोस्ट समाज में वैमनस्य फैलाने का काम कर रही हैं और इससे कभी भी स्थिति बिगड़ सकती है।
सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा मलिहाबाद के माहौल को जानबूझकर खराब करने और स्मृति द्वार को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची जा रही है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने प्रशासन की चिंता जरूर बढ़ा दी है। क्षेत्र के कई जिम्मेदार नागरिकों ने प्रशासन से अपील की है कि समय रहते सख्त कदम उठाए जाएं, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इस पूरे प्रकरण पर सुहेलदेव आर्मी के चीफ योगेश पासी ने भी कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि स्मृति द्वार को हटाने या उससे छेड़छाड़ करने की कोई भी कोशिश की गई, तो पासी समाज व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि स्मृति द्वार की सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
वहीं सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर शुभम पंडित का समर्थन पासी समाज को लगातार मिलता दिख रहा| वहीं सुहेलदेव आर्मी मलिहाबाद के प्रचारक अजीत पासी ने भी इसपर प्रशासन से नाराज़गी जताते हुए भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर कारवाही कि मांग की है
वहीं, राजनीतिक गलियारों में भी इस मुद्दे को लेकर हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दल जहां इस पूरे मामले में सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के नेता इसे कुछ लोगों द्वारा जानबूझकर भड़काया गया विवाद बता रहे हैं।
फिलहाल, मलिहाबाद का माहौल काफी संवेदनशील बना हुआ है। आम नागरिकों में शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है, लेकिन जिस तरह से सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री सामने आ रही है और दोनों समुदायों के बीच बयानबाजी तेज हो रही है, उसे देखते हुए प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस विवाद को किस तरह शांतिपूर्वक सुलझाता है।
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