कपिलवस्तु क्षेत्र के समग्र पर्यटन एवं विरासत विकास का मुद्दा : सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में  उठाया

भारत की सकारात्मक एवं प्रगतिशील छवि को पड़ोसी देशों के समक्ष और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा

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सिद्धार्थनगर- डुमरियागंज  सांसद  जगदम्बिका पाल ने गुरुवार को  लोकसभा के शून्यकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद (कपिलवस्तु क्षेत्र) के समग्र पर्यटन एवं विरासत विकास का महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया।
 
उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि प्राचीन कपिलवस्तु की वह ऐतिहासिक भूमि है, जहां  भगवान गौतम बुद्ध ने अपने जीवन के प्रारंभिक 29 वर्ष व्यतीत किए।
 
उन्होंने  विशेष रूप से जनपद में स्थित 10 ऐतिहासिक ‘सागरों’ (जलाशयों) की ओर ध्यान दिलाया, जिनका निर्माण वर्ष 1902 में किया गया था। इनमें से मर्थी, मझौली एवं सिसवा सागर, कपिलवस्तु स्तूप से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और प्रत्येक की जलधारण क्षमता 30 लाख घन फुट से अधिक है।
 
उन्होंने कहा कि अपार संभावनाओं के बावजूद ये जलाशय अभी तक समुचित योजना के अभाव में पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाए हैं। यदि इनका वैज्ञानिक एवं योजनाबद्ध विकास किया जाए, तो यह क्षेत्र एक प्रमुख इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित हो सकता है, जहाँ वॉटर स्पोर्ट्स, पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन, वुडन जोन तथा स्थानीय उत्पादों के विपणन हेतु ‘75 जिलों का मार्ट’ स्थापित किया जा सकता है।
 
उन्होंने  यह भी उल्लेख किया कि पिछले पाँच वर्षों में कपिलवस्तु क्षेत्र में लगभग 13.5 लाख विदेशी पर्यटकों का आगमन हुआ है, जो इस क्षेत्र की वैश्विक पर्यटन क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इन सागरों के सौंदर्यीकरण एवं समेकित विकास से पर्यटकों की संख्या में कई गुना वृद्धि संभव है।
 
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि नेपाल सीमा से सटे होने के कारण इन जलाशयों का विकास भारत की सकारात्मक एवं प्रगतिशील छवि को पड़ोसी देशों के समक्ष और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत करेगा।
 
सांसद  जगदम्बिका पाल ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि इन ऐतिहासिक सागरों के समग्र एवं एकीकृत विकास हेतु एक विशेष योजना तैयार की जाए, जिससे सिद्धार्थनगर को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

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