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नाम परिवर्तन की फाइल एक साल सी लटकी
पीड़ित लगा रहा नगर पालिका के चक्कर पे चक्कर, जिम्मेदार अधिकारी बने अंजान
बिसवां सीतापुर नियम कहते हैं कि संपत्ति नामांतरण 15 से 30 दिन में पूरा हो जाना चाहिए। लेकिन बिसवां नगर पालिका में एक विधवा महिला की फाइल करीब एक साल से अटकी है। योगी सरकार की जीरो टालरेंस निति से बेखौफ बिसवां नगरपालिका में तैनात भ्रष्ट कर्मचारी अपनी मनमानी पर उतारू हैं। जिससे एक विधवा महिला दर दर की ठोकरे खाने को मजबूर है।जो काम अधिकतम 90 दिनों में हो जाना चाहिए था।वह काम एक वर्ष की समय सीमा और हजारों खर्च के बाद भी पूरा नही किया गया आखिर क्यों ?
पीड़ित अय्यूब खान अपनी शिकायत मुख्यमंत्री को भेज कर यह आरोप लगाया है कि उसने सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कर दिए थे, इसके बावजूद उसकी फाइल बार-बार किसी न किसी बहाने से आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। कभी दस्तावेजों की जांच का हवाला दिया जाता है तो कभी संबंधित अधिकारी के अनुपस्थित होने का कारण बताकर उसे टाल दिया जाता है। पीड़ित का कहना है कि उसके द्वारा कई बार नगर पालिका के चक्कर लगाये जा चुके है, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
एक साल बीत जाने के बाद भी नामांतरण की प्रक्रिया पूरी न होना, नगर पालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।तथा पटल के कर्मचारियों को कटघरे में खड़ा करता हैं। एक तरफ तो प्रदेश की योगी सरकार द्वारा दाखिल खारिज प्रक्रिया को समय सीमा से पहले पूर्ण करने के आदेश निर्देश दिए जाते रहते हैं वहीं दूसरी ओर नगरपालिका परिषद बिसवां में जिम्मेदारों के भ्रष्टाचार के कारण न सिर्फ नामांतरण के लिए सुविधा शुल्क के नाम पर हजारों रूपये लिए जा रहे हैं। बल्कि एक वर्ष के लम्बे अंतराल के बाद भी घोर लापरवाही दिखाते हुए नामान्तरण प्रक्रिया पूर्ण नही की जा सकी है।
इतना ही नही एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी द्वारा पीड़ित की सम्पत्ति को राजकीय संपत्ति घोषित करने की धमकी तक दे दी जाती है।यह अपने आप में बड़ा सवाल है कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को किस अधिकार से पीड़ित से यह कहने का हौसला मिला कि तुम्हारी संपत्ति को राजकीय सम्पत्ति घोषित कर दिया जायेगा। क्या मान लिया जाए कि नगरपालिका बिसवां में तैनात कर्मचारी अपनी दबंगई के बल पर किसी भी सम्पत्ति को राजकीय संपत्ति में तब्दील कर सकते हैं ?
क्या एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से पटल के लिपिक का कार्य लिया जाना न्यायोचित है ? क्या नगरपालिका परिषद बिसवां में लिपिको का अकाल पड़ गया है। जो एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को टैक्स विभाग जैसे पटल का तथाकथित मुखिया बना दिया गया है ? सबसे बड़ा सवाल खबरों के प्रकाशन के बाद क्या जनपद के ईमानदार मुखिया जिलाधिकारी डा० राजा गणपति आर० इस मामले को संज्ञान लेकर किसी प्रकार की नजीर पेश करने वाली कार्यवाही करेंगे ?
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