दूसरों के दुख हरने वाला ही ईश्वर की कृपा  का  योग्य  हैं   -  कैलाश नाथ तिवारी

उन्होंने कहा कि मानव जन्म ईश्वर का अनमोल उपहार है, जो बार-बार नहीं मिलता। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को सद्कर्मों में लगाना चाहिए।

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 स्वतंत्र प्रभात संवाददाता 
सिद्धार्थनगर । 
 
 
नगर पंचायत बिस्कोहर के भरौली कैथोलिया में चल रहे पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ व संगीतमय पावन प्रज्ञा पुराण कथा के तीसरे दिन शनिवार की शाम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने प्रज्ञा पुराण की महिमा बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति स्वयं कष्ट सहकर भी दूसरों के दुखों को दूर करने का प्रयास करता है और दूसरों के सुख से सुखी होता है, वही ईश्वर की कृपा का सच्चा अधिकारी बनता है।
 
 
उन्होंने कहा कि मानव जन्म ईश्वर का अनमोल उपहार है, जो बार-बार नहीं मिलता। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन को सद्कर्मों में लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कर्मों के फल से कोई भी बच नहीं सकता, मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल अवश्य मिलता है।
 
 
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन स्वयं एक प्रत्यक्ष देवता है, जिसकी सच्चे मन से साधना और पूजा करने पर मनुष्य के सभी कार्य सफल हो सकते हैं। प्रज्ञा का अर्थ सद्बुद्धि से है, जो कभी विचलित न हो। जब मनुष्य के भीतर प्रज्ञा का जागरण होता है, तभी वह महानता के मार्ग पर आगे बढ़ता है।
 
 
कार्यक्रम के अंत में मां गायत्री व प्रज्ञा पुराण की आरती की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती में भाग लिया।
 
 
 इस मौके पर मिठाई लाल यादव, द्वारपाल चौरसिया, गोवर्धन यादव, जगदम्बा प्रसाद, मस्तराम यादव, वासुदेव पांडेय आदर्श राम मौर्य, जंगली यादव, लवकुश यादव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद
 
 
 
 

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