अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस । NDTVकी कलाकारों ने गीव टूगेन के साथ महिला की हर भूमिका का किया सम्मान।

 भगवान-कितना बदल गया इंसान‘ में ईना की भूमिका निभा रहीं अक्षया नाइक कहती हैं,

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स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज।
दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।
 
 
 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इस साल की थीम  GiveToGain गीवटूगेन इस विचार को सामने लाती है कि जब महिलाएँ प्रेम, साहस, मार्गदर्शन या अवसर देती हैं, तो बदले में उन्हें आत्मविश्वास, अनुभव और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। एक महिला अपने जीवन में जिम्मेदारियों और सपनों के बीच संतुलन बनाते हुए कई भूमिकाएं निभाती है।इसी भावना को साझा करते हुए एण्डटीवी के प्रमुख कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए।
 
  अक्षया नाइक ऊर्फ आगामी शो में भगवान-कितना बदल गया इंसान‘, की ईना, प्रियंवदा कांत ऊर्फ ‘घरवाली पेड़वाली‘ की लतिका, गीतांजलि मिश्रा ऊर्फ ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ की राजेश और शिल्पा शिंदे ऊर्फ ‘भाबीजी घर पर हैं‘ की अंगूरी भाबी!
 
 भगवान-कितना बदल गया इंसान‘ में ईना की भूमिका निभा रहीं अक्षया नाइक कहती हैं, “एक कलाकार के तौर पर मेरे दिन काफी व्यस्त होते हैं, लेकिन कैमरे के बाहर मैं एक बेटी, एक दोस्त और अपने रिश्तों को महत्व देने वाली इंसान भी हूँ। एक महिला होने का मतलब है लगातार अलग-अलग भूमिकाएँ निभाना-सेट पर स्क्रिप्ट याद करना और घर पर अपने परिवार के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े रहना। मैंने महसूस किया है कि जब भी मैं किसी को अपना समय, धैर्य या हौसला देती हूँ, मैं भीतर से और मजबूत बनती हूँ। मेरे लिए  गीवटूगेन का मतलब है कि जब हम किसी दूसरी महिला के सपनों का साथ देते हैं, तो हम सब मिलकर मजबूत बनते हैं। इस महिला दिवस पर मैं उन लड़कियों को आत्मविश्वास देना चाहती हूँ जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए सीमाएँ तोड़ना चाहती हैं।” 
 
‘घरवाली पेड़वाली‘ में लतिका का किरदार निभा रहीं प्रियंवदा कांत कहती हैं, “मेरे जीवन में कई भूमिकाएँ हैं। कई बार इन सबके बीच संतुलन बनाना मुश्किल लगता है, लेकिन यही एक महिला की असली ताकत भी है। हम संवारते हैं, साथ देते हैं और आगे बढ़ते रहते हैं। मेरे लिए गीवटूगेन का मतलब है दया देना, मार्गदर्शन देना और जहाँ संभव हो अवसर देना। जब हम किसी दूसरी महिला को आगे बढ़ाते हैं, तो हमें भी आत्मविश्वास और एकता मिलती है। सशक्तिकरण तब शुरू होता है जब हम एक-दूसरे का साथ देना चुनते हैं।” 
 
‘हप्पू की उलटन पलटन‘ में राजेश की भूमिका निभा रहीं गीतांजलि मिश्रा कहती हैं, । मैंने देखा है कि परिवार को संभालने के लिए महिलाएँ भावनात्मक और शारीरिक रूप से कितना कुछ देती हैं। गीवटूगेन मुझे यह याद दिलाता है कि हम जितना देते हैं, उतना ही अनुभव, साहस और दूसरों को प्रेरित करने की शक्ति भी पाते हैं। इस महिला दिवस पर आइए हम लड़कियों को शिक्षा दें, हर क्षेत्र में महिलाओं को सम्मान दें और उन लोगों का हौसला बढ़ाएँ जो खुद पर संदेह करते हैं, क्योंकि छोटा सा सहयोग भी बड़ा बदलाव ला सकता है।” 
 
‘भाबीजी घर पर हैं‘ में अंगूरी भाबी का किरदार निभा रहीं शिल्पा शिंदे कहती हैं, “ मेरा मानना है कि एक महिला होने का मतलब है हम घर में देखभाल करने वाली हैं, काम में पेशेवर हैं और अपने प्रियजनों के लिए ताकत का सहारा भी। कई बार हम भूल जाते हैं कि हम रोज कितना कुछ संभालते हैं। मुझे लगता है कि आत्मविश्वास की शुरुआत इस बात से होती है कि हम खुद को कैसे देखते हैं। इसलिए इस महिला दिवस पर एण्डटीवी के  हिस्सा बनकर मुझे बेहद खुशी हो रही है। यह एक खूबसूरत पहल है, जहाँ । मुझे खुशी है कि मैं इस अभियान का हिस्सा बनूँगी, प्रेरणादायक महिलाओं से मिलूँगी और उनकी कहानियों का जश्न मनाऊँगी। गीवटूगेन हमें याद दिलाता है कि जब हम अपने अनुभव साझा करते हैं, युवा महिलाओं का मार्गदर्शन करते हैं या बस उनका साथ देते हैं, तो सशक्तिकरण का एक मजबूत दायरा बनता है।”

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