पखवाड़ा बीता सरकारी जमीन पर कब्जा जस-का-तस विभाग कार्रवाई से कोसो दूर

लालच में राजस्व विभाग के कार्यशौली पर उठ रहे सवाल, दमड़ी के भाव दान किए जा रहे सरकारी जमीन सुविधा शुल्क लेकर विभाग ने बंद किया अपना मुंह

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संवाददाता अनील शुक्ला
 
बस्ती। बस्ती जिले के सबसे बड़ी तहसीलहर्रैया तहसील अंतर्गत राजस्व गांव बैरहना में गाटा संख्या 42 एवं 43 की जमीन पर बने कोठी को खाली कराना विभाग के गले का फांस बनता जा रहा है । उच्च अधिकारियों को शिकायती पत्र देने के बावजूद राजस्व विभाग द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नही किया गया है । ग्रामिणो ने विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि भूमाफिया कर्मचारी को दमड़ी का लालच दिखा कर अपने मनसुबे में कामयाब होते नजर आ रहे हैं।
 
पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।ग्रामीणों का आरोप है कि मामले की लिखित शिकायत उच्च अधिकारियों को देने के बावजूद राजस्व विभाग ने न तो स्थलीय निरीक्षण किया और न ही कब्जा हटाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए। इससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।गांव के लोगों का कहना है कि दबंग भूमाफिया कर्मचारियों को लालच/अपने पहुंच का भय दिखाकर कानून को मसलने की बात करते है। यहां जनता की बाते सही साबित हो रही है।
 
आठ जुलाई 2020 की शिकायत और फरवरी 2026 की शिकायतो पर यदि हरैया तहसील प्रशासन कार्रवाई की होती तो बुद्ध सागर पांडे को दुबारा डीएम को शिकायत नही देना पड़ता| दबंग भूमाफिया हरिश्चंद्र पाण्डे तथा नारायण पाण्डे का भय पूरे गांव में इस कदर व्याप्त है कि वह सबको कीडा मकोड़ा समझता है । सरकारी कर्मचारी को मसलने तक की बाते भी करते ग्रामीणो ने अपने कानो से सुना है । जो उन लोगों ने मीडिया को बताया है।
 
चर्चा यह भी है कि “सुविधा शुल्क” के चलते सरकारी जमीन को दमड़ी के भाव दान किए जाने जैसा माहौल बना हुआ है और जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे हुए है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी गंभीरता से लेता है और सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए कब तक प्रभावी कदम उठाए जाते हैं।

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