Haryana: हरियाणा के कुरुक्षेत्र पशु मेले में 21 करोड़ का झोटा कुबेर, देखने उमड़ी भीड़

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Haryana News: हरियाणा में कुरुक्षेत्र के मेला ग्राउंड में चल रहे 41वें राज्य स्तरीय पशु मेले में उस समय लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी, जब 21 करोड़ रुपये की कीमत वाला मुर्रा नस्ल का झोटा कुबेर मेले में पहुंचा। फतेहाबाद जिले के नाढ़ौड़ी गांव निवासी पशुपालक विकास भांभू कुबेर को अपने साथ मेले में लेकर आए हैं। हालांकि, उन्होंने इस झोटे को चैंपियनशिप प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया।

विकास भांभू ने बताया कि कुबेर पहले ही दुनिया के सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय पशु मेले पुष्कर (राजस्थान) में करीब तीन महीने तक चैंपियन रह चुका है। उन्होंने कहा कि “जब कोई पीएचडी कर ले, तो उसे दोबारा मैट्रिक करने की जरूरत नहीं होती।” इसी वजह से उन्होंने कुबेर को इस बार चैंपियनशिप में उतारने का फैसला नहीं किया।

मेले में कुबेर को खरीदने के लिए देश-विदेश से लोग पहुंचे। विकास के अनुसार, इटली के एक मीडिएटर के साथ आंध्र प्रदेश की एक पार्टी ने कुबेर को 21 करोड़ रुपये में खरीदने की पेशकश की थी। इससे पहले भी कुबेर पर 11 करोड़ रुपये तक की बोली लग चुकी है, लेकिन विकास भांभू ने साफ कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर कुबेर को नहीं बेचेंगे, चाहे कोई 50 करोड़ रुपये ही क्यों न दे दे।

हर महीने 15 से 20 लाख की कमाई

विकास भांभू ने बताया कि कुबेर उनके लिए सिर्फ एक झोटा नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह है। उसकी परवरिश बच्चे की तरह की गई है। त्योहारों पर कुबेर के लिए भी फल, ड्राई फ्रूट और विशेष आहार लाया जाता है। कुबेर के सीमन की एक डोज 500 रुपये में बेची जाती है, जिससे हर महीने 15 से 20 लाख रुपये की आमदनी हो रही है।

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कमाई नहीं, पहचान है मकसद

विकास का कहना है कि कुबेर से उन्हें कमाई का लालच नहीं है। इस झोटे ने उन्हें देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी पहचान दिलाई है। अब इंग्लैंड, अमेरिका और इटली से भी कुबेर को लेकर पूछताछ के फोन आते हैं। कुबेर उनकी मेहनत, शान और पहचान का प्रतीक बन चुका है, इसलिए उसे बेचने का सवाल ही नहीं उठता।

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शुद्ध मुर्रा नस्ल का झोटा

पशुपालक विकास भांभू के अनुसार, कुबेर की उम्र करीब पौने चार साल है और यह पूरी तरह शुद्ध मुर्रा नस्ल का झोटा है। इसकी ऊंचाई साढ़े पांच फुट है और चमड़ी पूरी तरह काली, मुलायम व चमकदार है। कुबेर की मां एम-29 है, जो साढ़े 23 लीटर तक दूध देती है। इसके पिता अर्जुन और दादा खली रहे हैं, जो विश्व स्तरीय चैंपियन झोटे रह चुके हैं।

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खास खानपान और देखभाल

कुबेर को रोजाना खल-बिनौला और चना खिलाया जाता है। इसके साथ ही 5 से 7 लीटर दूध पिलाया जाता है, जिसमें 200 से 250 ग्राम घी मिलाया जाता है। इसके अलावा गाजर और गाजर का जूस भी दिया जाता है। कुबेर की रोजाना 4 से 5 किलोमीटर की सैर करवाई जाती है और एक से डेढ़ घंटे तक मालिश की जाती है।

सुंदरता और ताकत का अनोखा मेल

विकास बताते हैं कि कुबेर सिर्फ ताकतवर ही नहीं, बल्कि खूबसूरती में भी बेजोड़ है। इसके मुंह की लंबाई और चौड़ाई एक समान है और शरीर की लंबाई करीब 8 फुट है। कुबेर अब तक करीब 3 हजार कटड़ों और कटड़ियों का पिता बन चुका है। फिलहाल विकास के पास कुबेर की 16 महीने की कटड़ी ‘लक्ष्मी’ भी मौजूद है।

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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l 

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