Gold Silver Price: सोना-चांदी की नई कीमतें हुई जारी, यहां करें चेक

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Gold Silver Price: मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) और सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में शुक्रवार को जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों द्वारा जताया जा रहा ‘बुलबुला फूटने’ का अंदेशा सच साबित हुआ और कीमती धातुओं के लिए यह दिन ऐतिहासिक क्रैश के रूप में दर्ज हो गया। एक ही कारोबारी दिन में चांदी की कीमत 1 लाख रुपये से ज्यादा टूट गई, जबकि सोना भी एक झटके में 33 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया। इस भारी गिरावट ने निवेशकों को हैरान कर दिया है।

बाजार के आंकड़ों के मुताबिक चांदी में आई यह गिरावट अब तक की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। 5 मार्च एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव गुरुवार को 3,99,893 रुपये प्रति किलो पर बंद हुआ था, जो शुक्रवार को तेज गिरावट के साथ 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर आ गया। इस तरह एक ही दिन में चांदी 1,07,971 रुपये सस्ती हो गई।

इतना ही नहीं, अगर गुरुवार को बने चांदी के रिकॉर्ड हाई लेवल 4,20,048 रुपये से तुलना करें तो महज 24 घंटे के भीतर चांदी 1,28,126 रुपये प्रति किलो टूट चुकी है। इसे बाजार जानकार चांदी के ‘बुलबुले के फूटने’ के तौर पर देख रहे हैं।

चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतों में भी जोरदार गिरावट देखने को मिली। 24 कैरेट सोने में भारी बिकवाली के चलते दाम तेजी से नीचे आए। 2 अप्रैल एक्सपायरी वाला सोना गुरुवार को 1,83,962 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर था, जो शुक्रवार को गिरकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। यानी एक ही कारोबारी दिन में सोना 33,113 रुपये सस्ता हो गया।

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अगर गुरुवार के लाइफ टाइम हाई 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम से तुलना करें, तो सोना अपने ऊपरी स्तर से अब तक 42,247 रुपये टूट चुका है। इससे साफ है कि सोने में भी तेज करेक्शन देखने को मिला है।

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बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। सबसे पहला कारण भारी मुनाफावसूली बताया जा रहा है। जब सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे, तो निवेशकों ने जमकर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिससे बाजार पर बिकवाली का दबाव बन गया।

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दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर और यूएस ट्रेजरी यील्ड में आई मजबूती है। डॉलर मजबूत होने से अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना-चांदी खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे मांग में कमी आती है और कीमतों पर दबाव पड़ता है।

इसके अलावा अमेरिका से जुड़े घटनाक्रमों का भी असर देखने को मिला है। डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों से वैश्विक तनाव में कमी के संकेत मिले हैं। वहीं, यूएस फेड में जेरोम पॉवेल की जगह केविन वार्श की एंट्री की चर्चाओं ने भी बाजार का सेंटिमेंट बदला है। इससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से निवेशकों का रुझान कुछ हद तक कम हुआ है।

31 जनवरी 2026 को आया यह बड़ा क्रैश इस बात का संकेत है कि बाजार में जरूरत से ज्यादा तेजी के बाद करेक्शन कितना तीखा और नुकसानदेह हो सकता है। जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में ईटीएफ और वायदा बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l 

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