आजादी के बाद भी नहीं बदली तस्वीर! मजरा जियाराम खास की कच्ची सड़क और टूटी पाइपलाइन ने सिस्टम की पोल खोली

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बारा, प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के बारा तहसील अंतर्गत मजरा जियाराम खास में विकास के दावों की जमीनी सच्चाई मौके पर उजागर हो गई। ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायतें महज आरोप नहीं बल्कि हकीकत हैं, यह तस्वीरों और वीडियो रिकॉर्डिंग में साफ दिखाई देता है। ग्रामीण मनोज कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि आजादी से लेकर आज तक गांव की यही हालत है, कच्ची सड़क जस की तस पड़ी है और बरसात में कीचड़ तथा गड्ढों के कारण गांव से निकलना दूभर हो जाता है। मौके पर मौजूद अन्य ग्रामीणों ने भी एक स्वर में बताया कि चुनाव के समय नेता और अधिकारी इसी रास्ते से होकर वोट मांगने जरूर पहुंचते हैं, लेकिन बाद में गांव की सुध लेने कोई नहीं आता। जब मीडिया द्वारा मौके पर जाकर पड़ताल की गई तो वही हकीकत सामने आई, जिसकी शिकायत ग्रामीण लंबे समय से कर रहे थे।
 
कच्ची सड़क, जलभराव और टूटी पाइपलाइन की तस्वीरें और वीडियो कैमरे में कैद हुईं, जिनमें ग्रामीणों की दर्द भरी आवाजें यह साफ बयां कर रही हैं कि उनकी पीड़ा वास्तविक है। जल जीवन मिशन के तहत वर्ष 2017 में बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन भी बदहाल है, जगह-जगह से लीकेज होने के कारण महीनों तक पानी नहीं पहुंचता और 80 प्रतिशत आबादी को दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, संपूर्ण समाधान दिवस में भी प्रार्थना पत्र दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
 
मौके पर मौजूद हर दृश्य यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या विकास योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई हैं। रास्ते और पानी की हालत देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी खुद मौके पर पहुंचे तो हालात देखकर उसकी रूह कांप जाएगी। अब बड़ा सवाल यह है कि खबरों के सामने आने के बाद क्या प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेगा या यह मामला भी अन्य फाइलों की तरह दबा दिया जाएगा। ग्रामीणों को अब आश्वासन नहीं, बल्कि सड़क और स्वच्छ पेयजल दोनों पर ठोस कार्रवाई का इंतजार है। 
 
 

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