ये माननीय, जो मान नहीं रहे; वोट लेने के बाद जनता को भूले, विकास को तरस रही विधानसभाएं

ये माननीय, जो मान नहीं रहे; वोट लेने के बाद जनता को भूले, विकास को तरस रही विधानसभाएं

ब्यूरो प्रयागराज। चुनाव आते ही नेता अपने-अपने वादों के साथ जनता के सामने पेश होते हैं. जनता को विकास और खुशहाली के लोकलुभावने सपने दिखाते हैंलेकिन जीतने के बाद स्थितियां बदल जाती हैं. कुछ नेता जीतने के बाद अपने वादों पर खरे उतरते हैंलेकिन कुछ तो गायब ही हो जाते हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश के वर्तमान विधायक अपने क्षेत्र में विकास के लिए विधायक निधि का कितना सही इस्तेमाल कर रहे हैंइसको लेकर ग्राम्य विकास विभाग उत्तर प्रदेश की ओर से mlaladsup.in पर अपलोड किए गए डाटा का विशलेषण किया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए

वर्तमान में उत्तर प्रदेश के विधायकों को हर साल 5 करोड़ रुपये अपने क्षेत्र के विकास के लिए मिलते हैं. वित्तीय वर्ष 2024-2025 के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि 403 में 6 ऐसे विधायक हैंजिन्होंने अपनी निधि का कुछ भी उपयोग नहीं किया है. यानी इन विधायकों ने एक साल में अपनी क्षेत्र की जनता के लिए कुछ नहीं किया है. इनमें शामली से विधायक प्रसन्न कुमार (आरएलडी)कैराना विधायक नाहिद हसन (सपा)उन्नाव के पुरवा विधानसभा के विधायक अनिल कुमार सिंह (भाजपा)महोबा सदर विधायक राकेश कुमार गोस्वामी (भाजपा)प्रयागराज के फूलपुर विधानसभा से विधायक दीपक पटेल (भाजपा)आजमगढ़ के फूलपुर-पवई विधायक रमाकांत यादव (सपा) शामिल हैं. फिलहाल रमाकांत यादव जेल में हैं

ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार10 विधायकों ने 5 करोड़ में से 1 करोड़ भी जनता के लिए खर्च कर पाए हैं. इनमें उन्नाव के सफीपुर विधायक बंबा लाल ने तो 2 लाख रुपये ही वित्तीय वर्ष 2024-25 में खर्च के लिए स्वीकृत किया है. जबकि सिधौली विधायक मनीष रावतगौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंहमुंगरा बादशाहपुर विधायक पंकज सिंहवाराणसी उत्तरी विधायक रवीन्द्र जायसवालबलिया विधायक दया शंकर सिंहमछलीशहर विधायक डॉ. रागिनीभोगनीपुर विधाक राकेश सचानजखनियां विधायक बेदीजौनपुर विधायक गिरीश चन्द्र यादव और अलीगढ़ शहर से विधायक मुक्ता संजीव राजा 1 साल में एक करोड़ निधि का भी काम नहीं करवाए हैं

सुल्तानपुर के विधायक विनोद पूरे प्रदेश में टॉपः वहींविधायक निधि का सबसे अधिक विकास कार्यों के लिए सुल्तानपुर से विधायक विनोद सिंह ने किया है. विनाद सिंह ने 9.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इनमें 2023-24 में जारी निधि भी शामिल हैजो बच गई थी. वहींबागपत विधायक योगेश धामा (6.95 करोड़)रसड़ा विधायक उमाशंकर सिंह (6.84 करोड़)हमीरपुर विधायक डा. मनोज कुमार प्रजापति (6.45 करोड़)कैम्पियरगंज विधायक फतेह बहादुर (6.28 करोड़)मुरादनगर विधायक अजीत पल त्यागी ( 6.27 करोड़)प्रतापपुर विधायक मती विजमा यादव (6.13 करोड़ )हर्रैया विधायक अजय सिंह (5.90 करोड़)लखनऊ उत्तर विधायक डॉ. नीरज बोरा (5.88 करोड़) और सिरसागंज विधायक सर्वेश सिंह ने 5.8 करोड़ रुपये अपनी निधि से खर्च किए हैं

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ग्राम्य विकास विभाग के पोर्टल पर उपलब्ध डाटा के मुताबिक 2024-25 में अपनी भविष्य निधि न खर्च करने वाले एनडीए के विधायक आगे हैं. भाजपा के 4आरएलडी और सपा के 1-1 विधायक शून्य खर्च वाले हैं. वहींनिधि का एक हिस्सा का भी इस्तेमाल न करने में भाजपा के माननीय अव्वल हैं. भाजपा के 7सपा के 2 और सुभासपा के 1 विधायक 70 लाख रुपये तक खर्च किया है

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सबसे अधिक निधि का उपोयग करने में भी सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही टॉप किया है. भाजपा के 7 विधायकों ने 2024-25 में जारी होने वाली निधि के साथ ही पिछले साल के बची निधि भी जनता के कार्यों में लगा दिया है. इस लिस्ट में समाजवादी पार्टी के भी 2 विधायक शामिल हैं. वहींबसपा के एक मात्र विधायक उमाशंकर सिंह ने भी पूरी निधि खर्च कर दी है

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गौरतलब है कि विधायक या एमएलसी अपने क्षेत्र की आवश्यकतानुसार मुख्य विकास अधिकारी को निर्माण कार्यों का विवरण देते हैं. इसके बाद स्वीकृत कार्य को शाकीय कार्यदायी विभागों के साथ ही राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कार्यदायी संस्था को कार्य दिया जाता है. यानी सिर्फ विधायक द्वारा योजनाओं की स्वीकृत देते हैं. इसके बाद कार्य की रूपरेखाटेंडर व अन्य प्रक्रिया शासन द्वारा अपनाई जाती है. कार्य पूरा होने के बाद मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जिलाधिकारी (DM) के जरिए विधायक निधि से सीधे कार्यदायी संस्था को भुगतान किया जाता है. विधायक द्वारा प्रस्ताव देने के बाद 45 दिनों में कार्य स्वीकृत और 3 महीने में कार्य शुरू करने का प्रावधान है।

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