कोन थाना क्षेत्र के आदिवासी व्यक्ति की गला दबाकर हत्या करने का आरोप
कांट्रेक्टर समेत पांच लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने का आदेश, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट सोनभद्र की कोर्ट ने प्रभारी निरीक्षक कोन को सीओ से विवेचना कराने व परिणाम से अवगत कराने का दिया आदेश
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सोनभद्र/ उत्तर प्रदेश - करीब दो माह पूर्व कंपनी के कांट्रेक्टर की मिली भगत से आदिवासी व्यक्ति सुरजमन चेरो की गला दबाकर हत्या किए जाने के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट सोनभद्र आबिद शमीम की अदालत ने प्रभारी निरीक्षक कोन को कांट्रेक्टर समेत पांच लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने व सीओ से मामले की विवेचना कराने के साथ ही परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है। यह आदेश कोन थाना क्षेत्र के गिधियाँ गांव के टोला डोड़वाखाड़ निवासी अरुण चेरो पुत्र स्वर्गीय सुरजमन चेरो द्वारा अधिवक्ता रोशनलाल यादव के जरिए दाखिल 173(4) बीएनएसएस प्रार्थना पत्र पर दिया गया है।
दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि 8 अक्तूबर 2025 को 8 बजे रात की घटना है। गांव के अरविंद गुप्ता व विनय गुप्ता पुत्रगण मानिकचंद गुप्ता, पंकज गुप्ता पुत्र उमेश गुप्ता व धीरज गुप्ता पुत्र सुभाष चंद गुप्ता एकराय होकर उसके घर पर आए और कहा कि महाराष्ट्र की एक कंपनी में काम करने चलना है। तुम बाप बेटा तैयार हो जाओ तुरंत चलना है। चोपन से ट्रेन पकड़ना है। जब जाने से मना कर दिया तो चारों लोग पिता पुत्र को मारने पीटने लगे और जबरन घसीटकर दो बाइक पर बैठाकर कोन बाजार ले गए।
विनय गुप्ता, पंकज गुप्ता व धीरज गुप्ता वापस लौट गए। अरविंद गुप्ता शक्तिपुंज ट्रेन से पिता पुत्र को जबलपुर ले गया। वहां से पिता पुत्र को नागपुर फिर महाराष्ट्र के चंद्रपुर ले गया। रास्ते भर पिता पुत्र को धमकी देता रहा कि अगर किसी से बताओगे तो जान से मरवा दूंगा। भयवश पिता पुत्र चुपचाप उसके साथ बस से एक कंपनी में घुघुस चला गया। जहां 12 अक्तूबर 2025 को पिता पुत्र को कंपनी में काम पर लगा दिया और पिता पुत्र की निगरानी करने लगा। कंपनी में काम करने वाला व्यक्ति अगर चोरी छिपे भागने की कोशिश करता तो उसे अरविंद गुप्ता व कंपनी के लोगों द्वारा मारापीटा जाता था।
घटना 10 नवंबर 2025 की है। जब उसके पिता सुरजमन चेरो चोरी छिपे घर भागकर आने की कोशिश कर रहे थे तो अरविंद गुप्ता ने उसके पिता को पकड़ लिया और साइड रूम में ले गया तथा कंपनी के लोगों की मदद से उनका गमछा से गला दबाकर हत्या कर दिया। उसके बाद मौके से अरविंद गुप्ता फरार हो गया। जब अरविंद गुप्ता के साइड रूम में गया तो वहां पर पिता की लाश पड़ी थी और अरविंद गुप्ता मौके पर नहीं मिला। तक इसकी सूचना कंपनी के सिक्योरिटी गार्ड को दिया और स्थानीय पुलिस की मदद से पिता की लाश सरकारी अस्पताल चंद्रपुर भेज दी गई।
जिसका 12 नवंबर 2025 को पोस्टमार्टम कराया गया। उसी दिन शव एम्बुलेंस से घर लेकर पहुंचा और अंतिम संस्कार किया गया। घटना की सूचना कोन पुलिस को दिया,लेकिन कोई कार्रवाई नहीं कि गई। इसीबीच 28 नवंबर 2025 को अभियुक्त ने मोबाइल पर फोन कर धमकी दिया कि एक लाख रुपये ले लो और कहीं सूचना मत देना नहीं तो तुम्हें भी जान से मरवा दूंगा। पिता की हत्या साजिश कर अभियुक्तगणों ने किया है। 11 दिसंबर 2025 को घटना की सूचना एसपी सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से भेजा, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब मजबूर होकर न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने अधिवक्ता रोशनलाल यादव के तर्कों को सुनने एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर गम्भीर प्रकृति का अपराध मानते हुए पुलिस द्वारा विवेचना कराया जाना आवश्यक मानते हुए प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। साथ ही कम्पनी के कांट्रेक्टर समेत पांच लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के साथ ही सीओ से विवेचना कराने व परिणाम से न्यायालय को अवगत कराने का आदेश दिया है।
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