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खसरा-रूबेला उन्मूलन पर प्रशासन सख्त, सर्विलांस और रिपोर्टिंग में ढिलाई नहीं चलेगी: डीएम
कानपुर। खसरा-रूबेला उन्मूलन को प्रभावी बनाने और विभागीय समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आज खसरा-रूबेला उन्मूलन हेतु अंतर-विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, बाल विकास सेवा, पंचायती राज, अल्पसंख्यक कल्याण समेत संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने कहा कि खसरा और रूबेला दोनों अत्यधिक संक्रामक वायरल रोग हैं और इनका उन्मूलन राष्ट्रीय लक्ष्य है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सर्विलांस सिस्टम को हर स्तर पर मजबूत करना होगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि खसरा और रूबेला के प्रत्येक प्रकरण की रिपोर्टिंग अनिवार्य रूप से की जाए। निजी चिकित्सकों से भी अपील की गई कि वे अपने यहां सामने आने वाले खसरा-रूबेला के मामलों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के साथ साझा करें। साथ ही, आमजन के बीच इन बीमारियों और उनके दुष्परिणामों को लेकर व्यापक जन-जागरूकता फैलाने पर जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि खसरे के प्रमुख लक्षण तेज बुखार, खांसी, जुकाम, आंखों में लाली और शरीर पर लाल चकत्ते हैं, जबकि रूबेला में हल्का बुखार और दाने होते हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं में यह रोग जन्मजात विकृतियों का गंभीर कारण बन सकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन लक्षणों की जानकारी समुदाय स्तर तक पहुंचाई जाए, ताकि संदिग्ध मामलों की समय पर पहचान हो सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि एमआर टीका सुरक्षित और प्रभावी है तथा बच्चों को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करता है। सामूहिक टीकाकरण से समुदाय में रोग के प्रसार की कड़ी टूटती है। 9 माह से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

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