ग़ोला विस्तारित क्षेत्रों में बंद पड़े सार्वजनिक शौचालय, नगर पंचायत गोला की उदासीनता उजागर
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ग़ोला -गोरखपुर - जनपद के दक्षिणांचल में स्थित जिले की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत गोला में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए सार्वजनिक शौचालय आज खुद बदहाली की तस्वीर पेश कर रहे हैं। हालात यह हैं कि नगर पंचायत के विस्तारित क्षेत्रों में बने कई सार्वजनिक शौचालय वर्षों से बंद पड़े हैं, जिससे आमजन खुले में शौच को मजबूर है और पवित्र सरयू नदी लगातार प्रदूषण की चपेट में आ रही है।
नगर पंचायत गोला में एक ओर जहां शौचालयों से निकलने वाला मल-मूत्र सीधे सरयू नदी में गिराया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्वच्छता के प्रतीक सार्वजनिक शौचालयों पर हमेशा ताले लटके रहते हैं। कागजों में केयर टेकरों की नियुक्ति दर्शाई जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर न तो शौचालय खुले हैं और न ही उनकी देखरेख हो रही है।
सबसे खस्ता हाल विस्तारित क्षेत्रों का है। वार्ड नंबर 4 भवनियापुर में स्थित सार्वजनिक शौचालय का निर्माण लगभग चार वर्ष पूर्व ग्राम सभा के समय कराया गया था। नगर पंचायत में शामिल होने के बाद लाखों रुपये खर्च कर इसमें टाइल्स और सौंदर्यीकरण कराया गया, लेकिन आज तक यह शौचालय आम जनता के उपयोग के लिए नहीं खोला गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत केवल कागजों तक सीमित रही। इस संबंध में वार्ड सभासद संदीप सोनकर ने अनभिज्ञता जताते हुए जांच की बात कही, जबकि लोगों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
वार्ड नंबर 10 की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है। रानीपुर, अतरौरा सब्जी मंडी और सरकारी पशु चिकित्सालय के सामने बने तीनों सार्वजनिक शौचालय हमेशा बंद रहते हैं। इसी तरह वार्ड नंबर 11 बेवरी में बना सार्वजनिक शौचालय भी वर्षों से बंद पड़ा है। ये सभी शौचालय विस्तारित क्षेत्रों में आते हैं, जो नगर पंचायत की अव्यवस्था और लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि स्वच्छता के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, योजनाओं का खूब प्रचार हो रहा है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहा। सभासदों, चेयरमैन और अधिशासी अधिकारी की निष्क्रियता का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। खुले में शौच से न सिर्फ बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, बल्कि सरयू नदी का पर्यावरण भी गंभीर संकट में है।
लोगों ने मांग की है कि बंद पड़े सार्वजनिक शौचालयों को तत्काल चालू कराया जाए, सरयू नदी में गिर रहे गंदे पानी पर रोक लगाई जाए और विस्तारित क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाए, ताकि स्वच्छता अभियान केवल कागजी दावा बनकर न रह जाए।
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