Haryana Weather: हरियाणा में शीतलहर का अलर्ट, सरकार ने जारी की बचाव एडवाइजरी
Haryana Weather: उत्तर भारत में लगातार बढ़ रही सर्दी और संभावित शीतलहर को देखते हुए हरियाणा सरकार सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में राज्य सरकार ने शीतलहर और पाले से बचाव को लेकर आम जनता और किसानों के लिए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी भारतीय मौसम विभाग (IMD) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई “शीतलहर कार्य योजना” के तहत लागू की गई है।
पिछले अनुभवों को देखते हुए जारी हुई चेतावनी
शीतलहर की परिभाषा क्या है?
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, जब मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस या उससे कम और पहाड़ी इलाकों में तापमान शून्य डिग्री के आसपास पहुंच जाए, तो उसे शीतलहर की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे हालात में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
अंगीठी और कोयले के इस्तेमाल से बचने की सलाह
सरकार ने लोगों को बंद कमरों में कोयला या अंगीठी जलाने से सख्त परहेज करने की सलाह दी है। डॉ. सुमिता मिश्रा ने चेतावनी दी कि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। इसके अलावा पालतू जानवरों, मवेशियों और घरेलू पशुओं को ठंड से बचाने के लिए उन्हें सुरक्षित और गर्म स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।
हाइपोथर्मिया से बचाव पर जोर
शीतलहर के दौरान हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रभावित व्यक्ति को तुरंत गर्म स्थान पर ले जाने और शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने की सलाह दी गई है। समय पर उपचार न मिलने पर यह स्थिति गंभीर हो सकती है।
किसानों के लिए फसल बचाव की विशेष एडवाइजरी
सरकार ने किसानों को भी शीतलहर से फसलों को होने वाले नुकसान को लेकर सतर्क किया है। शीतलहर के कारण गेहूं और जौ में काला रतुआ, सरसों और सब्जियों में सफेद रतुआ तथा आलू व टमाटर में लेट ब्लाइट जैसी बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है।
किसानों को बोर्डो मिश्रण या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने, फास्फोरस और पोटाश का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही शीतलहर के दौरान हल्की और बार-बार सतही सिंचाई करने तथा जहां संभव हो वहां स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाने की सिफारिश की गई है।
ठंड में उर्वरक डालने से बचें
एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि शीतलहर के दौरान मिट्टी में पोषक तत्व न डालें। ठंड के कारण पौधों की जड़ों की सक्रियता कम हो जाती है, जिससे वे पोषक तत्वों को अवशोषित नहीं कर पाते और खाद बेकार चली जाती है।


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