ख़जनी : श्रीमद्भागवत कथा: जीवन की व्यथा दूर करने का मार्ग ,अखिलेशनन्द महराज

खजनी क्षेत्र बरी बन्दुआरी में कथा के तीसरे दिन बृंदाबन से आए यज्ञाचार्य अखिलेशनन्द जी के मुखर बिंद से कथा रसपान कर मनमुग्ध हुए स्रोता

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रिपोर्टर/रामअशीष तिवारी


खजनी, गोरखपुर: तहसील क्षेत्र के खजनी में तीसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन हुआ। वृंदावन से पधारे यज्ञाचार्य एवं कथाव्यास श्री अखिलेशानंद जी महाराज ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि  श्रीमद्भागवत कथा सुनने से जीवन की व्यथा दूर होती है और कई जन्मों के पुण्य उदय होने पर ही यह अवसर प्राप्त होता है।  

कथा में द्रौपदी के चीर हरण प्रसंग का वर्णन करते हुए अखिलेशानंद जी ने बताया कि जब भरे दरबार में द्रौपदी की लाज बचाने कोई नहीं आया, तब उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा। प्रभु ने द्रौपदी की मर्यादा की रक्षा कर दुःशासन का मानमर्दन किया। कथावाचक ने शिव-पार्वती विवाह का उल्लेख करते हुए कहा कि शिव विश्वास और पार्वती श्रद्धा के प्रतीक हैं। इनके मिलन से जगत का कल्याण होता है। भगवान शंकर ने पार्वती से विवाह कर देवताओं और विश्व का मंगल स्थापित किया।  

इस कथा के मुख्य आयोजक विष्णु देव त्रिपाठी, दुर्गेश मिश्रा, गिरिजेश त्रिपाठी, शैलेश त्रिपाठी सहित समस्त ग्रामवासी और क्षेत्रवासी श्रद्धालु भक्तों की उपस्थिति में कथा श्रवण के लिए मौजूद रहे। यह आयोजन भक्ति और आध्यात्मिकता का अनुपम संगम बना।

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