कुशीनगर : वाद्य यंत्रों की खरीद पर संस्कृति विभाग देगा अनुदान

कीर्तन मंडली,स्थानीय लोकगीत, लोक नृत्य,भजन,नुक्कड़ नाटक संचालन करने वाली ग्राम पंचायतों को प्राथमिकता

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 कुशीनगर, स्वतंत्र प्रभात। ग्राम पंचायत स्तर पर स्थानीय लोक कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के सुचारू रूप से संचालन , प्रशिक्षण, प्रस्तुतीकरण एवं गुरु शिष्य परंपरा के निर्वहन हेतु प्रदेश की ग्राम पंचायतों को वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने हेतु संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा कार्य योजना के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

जिलाधिकारी रमेश रंजन ने बताया कि शासन द्वारा निर्गत पत्र के क्रम में अवगत कराया है कि

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Kushinagar, Gorakhpur, Lucknow

ग्राम पंचायतों को एक सेट वाद्य यंत्र, हारमोनियम, ढोलक, झांझ, मंजीरा , करताल अथवा घुंगरू इत्यादि की खरीद हेतु संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा अनुदान दिया जाएगा। वाद्य यंत्र की एक सेट की खरीद हेतु धन राशि ₹30000 से अधिक होने पर संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा ₹15000 तक का अधिकतम अनुदान संबंधित ग्राम पंचायत को दिया जाएगा, शेष धनराशि संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा वहन की जाएगी। वाद्य यंत्रों के एक सेट पर संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश का नामांकन कराया जाना अनिवार्य होगा। प्रथम चरण में जनपद की 50 ग्राम पंचायतों, जहां सांस्कृतिक गतिविधियां निरंतर संचालित की जाती हो, का चयन कर संस्कृति विभाग को संस्तुति सहित प्रेषित किया जाएगा। पर्याप्त मात्रा में आवेदन प्राप्त न होने की स्थिति में विभाग द्वारा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के माध्यम से अग्रसारित आवेदन पत्र सीधे भी स्वीकार किए जा सकेंगे। ग्रामीण पर्यटन हेतु चयनित 229 ग्राम को सम्मिलित किया जाएगा। पूर्व में सांस्कृतिक कार्यक्रमों (जैसे कीर्तन मंडली, गुरु शिष्य परंपरा, स्थानीय लोकगीत, लोक नृत्य, भजन ,संस्कार गीत, नुक्कड़ नाटक आदि)का संचालन करने वाली ग्राम पंचायतों को अनुदान दिए जाने में प्राथमिकता दी जाएगी। आवेदन करते समय आवेदन पत्र के साथ क्रय किए जाने वाले वाद्य यंत्रों का विवरण तथा करें एस्टीमेट मूल रूप से संलग्न करना होगा। अनुदान की धनराशि सीधे आवेदक ग्राम पंचायत के खाते में हस्तांतरित की जाएगी। विभाग से अनुदान प्राप्त होने के पश्चात एक माह के अंदर वाद्य यंत्रों का क्रय करके बिल एवं वाद्य यंत्रों की छायाचित्र संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर वसूली की कार्यवाही करने का अधिकार निदेशक कोमा संस्कृति के पास सुरक्षित होगा पुलिस वाद्य यंत्रों के रखरखाव एवं मरम्मत का दायित्व संबंधित ग्राम पंचायत का होगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा ग्राम सभा के सदस्यों द्वारा मांगे जाने पर वाद्य यंत्र सांस्कृतिक आयोजनों हेतु उपलब्ध कराए जाएंगे जिसका अंकन एक पृथक रजिस्टर में किया जाएगा वित्तीय वर्ष की समाप्ति के पश्चात प्रत्येक ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए सांस्कृतिक आयोजनों का विवरण संस्कृति विभाग को प्रेषित करना होगा स्टॉप वाद्य यंत्रों का केंद्रीय व्यवस्था के तहत किया जाएगा।

(ब) वाद्य यंत्रों का उपयोग उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक उन्नयन , सांस्कृतिक विरासत का आरक्षण , पर्यटन संवर्धन स्वच्छ भारत मिशन सर्व शिक्षा अभियान महिला सशक्तिकरण बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ ग्रामीण संस्कृति को अक्षुण्ण रखने तथा सरकार द्वारा संचालित लाभार्थी योजनाओं के प्रचार प्रसार इत्यादि हेतु किया जाएगा।

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(स) पुरस्कार हेतु चयन की प्रक्रिया के क्रम में जिलाधिकारी/जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद उत्तर प्रदेश की संस्कृति के क्रम में उत्कृष्ट प्रस्तुतीकरण करने वाले दल को प्रथम कॉमन द्वितीय एवं तृतीय स्थान धारक को पुरस्कृत किया जाएगा। पुरस्कार हेतु गठित समिति द्वारा समस्त कार्यवाही पूर्ण की जाएगी।

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 निदेशक संस्कृति निदेशालय उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रहेंगे वित्त नियंत्रक संस्कृति निदेशालय तथा जिला सूचना अधिकारी लखनऊ इनके सदस्य रहेंगे तथा निदेशक संस्कृति द्वारा नामित सहायक निदेशक संस्कृति निदेशालय सदस्य व सचिव रहेंगे। (द) प्रथम स्थान द्वितीय स्थान व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले दल को क्रमशः ₹51000 ₹21000 तथा ₹11000 पुरस्कार की धनराशि दी जाएगी। 

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