खेतों की फसल व पराली जलाने पर किसानों पर होगी कड़ी कार्यवाही

खेतों की फसल व पराली जलाने पर किसानों पर होगी कड़ी कार्यवाही

-खेत की पराली फसल अवशेष को निराश्रित गौशाला में करें दान 


स्वतंत्र प्रभात 
 

महोबा । राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में सभी किसानों से अपील की गई की अपने खेतों की फसल/ पराली को कदापि न जलाएं। खेत की पराली/ फसल अवशेष को स्वयं के उपयोग में लाने पर निकटस्थ के निराश्रित गौशाला में दान करें। तथा जितना हो सके अपने फसलों की कटाई हार्वेस्टर विद सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एस. एम.एस) मशीन से ही करें ताकि फसल पराली खेतों में अवशेष ही ना रहे।

               आपको बता दे की जनपद में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन में फसल अवशेष पराली को जलाए जाने पर निषेध के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आरोपण एवं वसूली की प्रक्रिया का प्रावधान है। जिसके अंतर्गत 02 एकड़ से कम क्षेत्रफल में फसल अवशेष पराली जलाने पर रुपए 2500 प्रति घटना, 02 एकड़ से 05 एकड़ तक रुपए 5000 घटना तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल रु 15000 घटना अर्थदंड के रूप में वसूल किए जाने का प्रावधान है। 


साथ ही यह भी बताया गया कि फसल अवशेष पराली को जलाए जाने की लगातार दो घटनाएं होने पर संबंधित कृषकों को सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं तथा सब्सिडी आदि से वंचित किए जाने की कार्यवाही अमल में लाई जायेगी। फसल अवशेष पराली को जलाने से जमीन में जीवन पदार्थों की कमी, मित्र कीटों का हास, पर्यावरण प्रदूषण एवं मृदा स्वास्थ्य में कमी तथा मृदा की उत्पादकता में प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।


 जिसे फसल अवशेष को जुताई कर मिट्टी में मिला एवं सिंचाई करें जिससे खेत की जल धारण क्षमता बढ़ती है। तथा खेत में जीवांश की मात्रा बढ़ने से ही लाभदायक जीव केंचुए आदि पनपते हैं और खेत की उपज में वृद्धि होती है। जिससे फसल अवशेष से किसान नाडेप कंपोस्ट या वर्मी कंपोस्ट भी बना सकते हैं।

 जहां उप कृषि निदेशक द्वारा सभी किसानों से अपील की गई कि वह अपने खेतों के फसल अवशेष पराली को कदापि ना जलाएं। खेत की पराली फसल अवशेष को स्वयं के उपयोग में ना लाने पर निराश्रित गौशाला में दान करें। साथ ही फसलों की कटाई हार्वेस्टर विद सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एस.एम.एस) मशीन से ही कराएं ताकि फसल अवशेष पराली खेतों में अवशेष ही ना रहे।


 

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