मजदूर
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दो जून की रोटी : संघर्ष, सम्मान और समाज की जिम्मेदारी - पत्रकार सरस सिंह
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By दया शंकर त्रिपाठी
"दो जून की रोटी"— यह केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन का सबसे बड़ा सच है। जब कोई व्यक्ति कहता है कि उसे "दो जून की रोटी" कमानी है, तो उसके पीछे सिर्फ भोजन की जरूरत नहीं,...

