न्यायिक सुधार

न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता का समय

भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में न्यायपालिका केवल विवादों का निपटारा करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि संविधान की सर्वोच्चता, नागरिक अधिकारों और विधि के शासन की अंतिम संरक्षक भी है। इसलिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त मानी जाती...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

बाईस वर्षों की कैद, एक निर्दोष की चीख और न्याय का मौन

भारत की न्याय व्यवस्था का एक मूल सिद्धांत है कि सौ अपराधी छूट जाएं, लेकिन एक भी निर्दोष व्यक्ति को दंड नहीं मिलना चाहिए। यह सिद्धांत केवल कानून की किताबों में लिखी गई पंक्ति नहीं, बल्कि सभ्य समाज की आत्मा...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल

भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

बराक घाटी में स्थायी हाईकोर्ट बेंच की मांग को मिला जनसमर्थन, श्रीभूमि में 300 से अधिक लोगों ने किए हस्ताक्षर।

श्रीभूमि असम संवाददाता स्वतंत्र प्रभात :     असम के गुवाहाटी हाईकोर्ट की एक स्थायी बेंच बराक घाटी के किसी उपयुक्त स्थान पर स्थापित किए जाने की मांग के समर्थन में आज 27 जून शनिवार को श्रीभूमि जिले के बिपिन पाल स्मृति...
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नया न्यायिक सवेरा – जब न्याय समय पर मिले, तो हर घाव भर जाता है

प्रो. आरके जैन “अरिजीत” भारतीय न्याय व्यवस्था में कुछ फैसले केवल कानूनी आदेश नहीं होते, बल्कि बदलाव की नई दिशा तय करते हैं। 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देश ऐसा ही एक ऐतिहासिक हस्तक्षेप है। न्यायमूर्ति...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

मुकदमों की पेंडिंग लिस्ट बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जजों की संख्या है.।

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में केवल 110 जज हैं. इन जजों के भरोसे ये 12 लाख पेंडिंग केस हैं. केस निपटाने को लेकर जजों पर प्रेशर भी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत केसों की पेंडिंसि खत्म...
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