Swantantra prabhat kavita sangrah

इल्जाम

एक इल्जाम  मेरे नाम आया है  न होते हुए भी मोहब्बत सरेआम  मेरा नाम आया है।      मैं ढूंढता रहा  हर जगह खुद को ही    न जाने क्यों   फिर भी मेरा नाम किसी ओर के साथ आया है।    लोग पूछते रहे...
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'बजट' अच्छा या बुरा...!

देश में पेश हो चुका है आम केंद्रीय बजट, हर बार 'राजनीतिक प्रतिक्रिया' हैं विकट। कोई भी दल हटकर क्यों? नहीं बोल पाते, सत्तापक्ष और विपक्ष भिन्न दिशा में जाते।    सत्तापक्ष बजट को उपलब्धियों से गिनाते, विपक्ष 'जनविरोधी और दिशाहीन'...
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आधा-अधूरा बचपन

संजीव-नी।आधा-अधूरा बचपन।ईश्वर, आज स्कूल की घंटी से पहलेएक बच्चे नेरोटी की आवाज़ सुनी,पर थाली तकआवाज़ नहीं पहुँची।उसकी जेब मेंकंचे नहीं,था खालीपन ,और पेट मेंइतनी जगहकि सपना भीपूरे...
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ऊँचाइयों पर कभी परवाने नहीं होते”

ऊँचाइयों पर कभी परवाने नहीं होते”ऊँचाइयों पर कभी परवाने नहीं होते,आसमान पर ठौर-ठिकाने नहीं होते।कदम सम्भल कर उठाना मेरे दोस्त,कम खंजर चलाने वाले नहीं होते।ख़ुद की शोहरत, ख़ुद को ही भाती है,यहाँ नफ़रत के...
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ख्वाबों की दुनिया सजाई थी मैंने। 

संजीव-नी।    ख्वाबों की दुनिया सजाई थी मैंने।     दिल में ख़्वाबों की दुनिया सजाई थी मैंने,  तेरे आने की चाहत जगाई थी मैंने।     तेरे आने से महफ़िल गुलज़ार हो उठी, राह पलकों पे अपनी बिछाई थी मैंने।     तेरी पायल की छन...
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