लमही वाराणसी

जिस कलम की उम्र लेखक से बड़ी हो गई — वही प्रेमचंद है

शब्दों से समाज की आत्मा लिखने वाले साहित्यकार विरले होते हैं। 31 जुलाई केवल जन्मतिथि नहीं, उस युगदृष्टा का स्मरण है जिसकी लेखनी आज भी अन्याय और विषमता से प्रश्न करती है। लमही में जन्मे धनपत राय, जिन्हें...
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