नारी बंधन परिसीमन बिल गिरने पर बीजेपी का विपक्ष पर देश व्यापी विरोध सोची समझी स्क्रिप्ट है
जब कि विपक्ष बार बार मांग कर रहा था लागू करो पर सरकार सरकार होती है मनमर्जी तो करेगी कर लिया लागू 2024 मे नहीं किया
प्रोफेसर अशोक कुमार
17अप्रैल को लोक सभा में परिसिमन बिल सरकार का गिर गया।फिर क्या बिल गिरते ही ससद भवन से बाहर भाजपा के लोगों ने हाथ में स्लोगन लिखे पोस्टर बैनर दफ्ती लेकर विपक्ष के विरोध में घेराव करते रहे।बस यही झूठ बोलते रहे कि महिला आरक्षण बिल कांग्रेस ने और महिलाओं के विरोधी विपक्ष ने गिरा कर देश के नारियों का अपमान किया ।यह सब पोस्टर बैनर स्लोगन लिखी पट्टिक पहले से भाजपा ने तैयार कर लियि था कि बिल गिरेगा फिर भाजपा नारा लगायेगी सब पहले से स्क्रिप्ट तैयार थी महज देश की जनता को महिलाओं को बस आरक्षण केशवराम पर धोखा देना था।वह दिया गया पहले से पास बिल को 2024मे नहीं लागू किया गया जब कि विपक्ष बार बार मांग कर रहा था लागू करो पर सरकार सरकार होती है मनमर्जी तो करेगी कर लिया लागू 2024मे नहीं किया।
परन्तु नारा लगाने वाले भूल गये कि देश की नारी शक्ति का पहला हक कांग्रेस के स्व प्रधान राजीव गान्धी ने ही पंचायती राज में तीनों स्तर पर यानि पंचायत से जिला परिषद तक तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दिया जो आज भी लागू है। उसमें भाजपा कि किस तरह पन्द्रह साल की सीमा नहीं लगाया था। वह एक कानुन बन गया और उसीके तर्ज पर बहुत से राज्यों में पचायतीराज में पचास प्रतिशत आरक्षण दिया है।तब कांग्रेस महिला विरोधी नहीं विपक्ष नारी विरोधी नहीं था।फिर अब कैसे होगया।
बस यही किया एक गलत परिसीमन बिल को पास नहीं किया।भाजपा की महिला सांसदों ने कभी भाजपा से संसद विधानसभाओं में जब आरक्षण का बिल कांग्रेस ला ई थी भाजपा ने क्यों नहीं समर्थन किया । क ई बार कांग्रेस की सरकार बिल को लोक सभा में पास करने का प्रयास किया पर हर बार भाजपा ने विरोध किया कारण तो भारत की जनता सब राजनेता जानते हैं।लेकिन भाजपा सच को छिपातीं है महिलाओं के पीछे छिपती है ।और कांग्रेस के द्वारा खींची गई हर लकीर को मिटाने और छोटा करने में विगत बारह साल से लगी हुई है। पर लकीर मिटा नहीं पा रही है जितना मिटाने की कोशिश होती है वह लकीर बड़ी हो जाती है।
वर्तमान सरकार जनोपयोगी क ई क ई बिलों को कांग्रेस के समय पास में जो था जनता उसका उपयोग कर रही थी। सरकार रोक लगा दिया सुचना के अधिकार मनरेगा जैसे बिलों पर कैंची चलाया ।तब भाजपा का कोई नेता संगठन सड़क पर नहीं आया जैसा कि महिला परिसीमन बिल को लेकर सड़क पर दौड़ रहे हैं। और झूठ भ्रम जनता में फैला रहे हैं। कांग्रेस ने 2012मे महिला बिल को राज्य सभा से पारित करा लिया जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण था पंचायती राज की तरह ही। परन्तु जो नया बिल पास भाजपा ने 2023मे सभी दलों की सहमति से पास करवाया है वह बिल आज भी अस्तित्व में है।
अगर वास्तव में भाजपा नारी शक्ति का सम्मान करता है तोउसे देश में लागू कर दे।अगर लागू नहीं कर रहा है तोयह मान लें भाजपा सरकार का नारी आरक्षण बिल सड़क का खिलौना बनाकर जनता में तमाशा दिखाने के सिवाय सच से बहुत दूर है।यह एक चुनावी नौटंकी से आगे कुछ नहीं है।अब यहां सवाल हर दल से है । अगर महिला आरक्षण बिल संसद विधानसभाओं में नहीं लागू हो रहा है । तो हर दल क्यों नहीं पार्टी के सम्विधान में यह लिखे की पार्टी अपने स्तर पर तैंतीस प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया जायेगा वह संसद विधानसभाओं के साथ पार्टी के संगठन में भी दिया जायेगा।
यहां यह भी बताना जरूरी है कि 2022मे यूं पी विधानसभा चुनाव में लड़की हूं लड सकती हूं का नारा प्रियंका-गांधी ने दिया और चालीस प्रतिशत विधानसभा में महिलाओं को टिकट दिया ।परन्तु गजब यूं पी की महिलाएं अपनी ही बहनों को हरा दिया जबकि वह सख्याबल में आबादी की आधीहै चाहती तो कम से कमज्ञतीस प्रतिशत कांग्रेस की महिलाएं विधायक बन गई होती पर महिलाएं भी जातिवादी धरृमवादी पारृटी वाली है तभी तो कांग्रेस की चालिस प्रतिशत महिलाएं चुनाव हार गई मात्र एक महिला जीती अराधना मिश्रा वह भी अपने पिता की सीट राम पुर खास से।
इस चालिस प्रतिशत की हार से डर कर सांसद में सभी दलों ने महिलाओं को कम टिकट दिया।किसी दल के पास ताकत नहीं है कि महिलाओं के आरक्षण नियम को पहले पार्टी में बनाये लागू करें। फिर संसद विधानसभा की बात करें हर पार्टी की नियत में खोट है।अभी जो वर्तमान संसद है उसमें सबसे कम संख्या भाजपा की महिलाएं हैं सबसे ज्यादा तृणमूल की महिला सासद है इसी संख्या से पता चलता भिजवा कितना महिलाओं का सम्मान करती है।आज तक कोई महिला भाजपा का राष्ष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बन पाईहैक्या भाजपा प्रेस कान्फ्रेंस करके जनता को बतायेगी कि किस कारण से वह महिलाओं को राष्ट्रीय अध्यक्ष आज तक नहीं बनाया।
एक उदाहरण यह भी देख ले 2022मे राजस्थान में वसुंधरा राजे के नेतृत्व में विधानसभा का चुनाव भाजपा जीत जाती है वह दोबारा की मुख्य मंत्री थी एक मात्र महिला थी भाजपा की फिर भी उनको मुख्यमंत्री नहीं बनाया। यही नारी शक्ति है ।असली भाजपा का चाल चरित्र चेहरा अलग है।फिर बात चली वसुंधरा राजे सिंधिया को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जायेगा तीन महीने तक बात हर पत्रकार करता रहा लेकिन वहां से भी वसुंधरा राजे को हटाया गया नारी थी तो सम्मान कैसे भाजपि करती बिहार चुनाव को देखकर नीतीश नवीन को जाति का वोट कायस्थ वोट साधने को मोहरा वाला अध्यक्ष बना लिया।इनके पूर्व जो अध्यक्ष थे वह भी मोहरा वाले थे वैसे हर पार्टी में यही परम्परा अध्यक्ष मोहरा वाला ही सही होता तेज होगा तो पार्टी पर कब्जा करके राजनिति की शिखर हो जायेगा फिर जिसने अध्यक्ष बनाया उसी को मारेगा हर पार्टी में मुगल शासक का कानुन न चले तभी मोहरा वाला कमजोर राम का अध्यक्ष या जाति समकरण वाला ही बनाया जाता जिससे जाति का वोट अपने पाले में कर लें।
17अप्रैल से कहीं न कहीं भाजपा की महिलाएं महिला आरक्षण बिल का विरोध मेसडक पर है तो कांग्रेस की भी महिला संगठन सड़क पर 2023मे पास बिल को लागू करने के लिए तथा परिसीमन बिल जो गिरा उसके समर्थन में सड़क पर पतृरकार वार्ता कर ली है।18अप्रैल को चुनाव आचार संहिता का उलंघन कश्रते हुए देश के साहब ने गलत महिला संशोधन बिल पर राष्ट्राभिनंदन किया सही बात जनता को नहीं बताया बस एक लट कांग्रेस महिला विरोधी हैं महिलाओं के आरक्षण को संसद में रोक दिया भाजपा नारी सम्मान देना चाहती थी परन्तु वह नहीं हो पाया पर यह नही कहा कि जो बिल 2023मे पास है उसे लागू करने जा रहा हूं।
क्यों संसदों की सख्या बढ़ाकर आरक्षण देना है क्या नौकरियों में शिक्षा में ऐसा हुआ है क्या पंचायतों में दो तीनों सृतर पर आरक्षण लागू है तो सीटें बढ़ीं है।नहीं तो संसद और विधानसभाओं में क्यों पचास प्रतिशत सीट बढ़ाने के लिए गलत परिसीमन बिल लाया गया।।भाजपा जानती थी यह बिल पास नहीं होगा वह तो बस जनता का एक अहम मूद्दे इरान अमेरिका इजरायल युद्ध की बात जनता में बंगाल तमिलनाडु के चुनाव में न उठे तो जनता को वरगलाने के लिए मुख्य समस्या हटाने के लिए ही। बिल लाया गया थाजोविपक्ष की एक छूटता से विफल होगया देश को बांटने का बिल था गिर गया।
वास्तव में भाजपा ईमानदार है नारी शक्ति वन्दन को महत।व दे ना चाहती है तो पहले अपनी पारृटी में हर स्तर पर तैंतीस प्रतिशत आरक्षण दे-दे और महिला को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दे ।पर ऐसा होंगा नहीं बस चुनाव और वोट के लिए ही नारी सम्मान की बात कही जाती है उत्तराखंड में अंकिता भण्डारी। यूं पी में उन्नाव हिथरस बेटियों को सम्मान तो दिया नहीं फिर कैसे नारी शक्ति वन्दन बिल पर घड़ियाली आंसू गिरा रही है भाजपा।असल में भारत की जनता के आंखों पर गांधारी की तरह पट्टी बंधी हुई है वह सच को देख नहीं पा रही बस जो सुनती है वहीं सच मान कर पूजा कर रही है शबृद बोलने वालों का लोकतंत्र में सत्ता के लिए घबियिली आंसू ब आने वाले का।देश में इरान अमेरिका युद्ध पर राष्ट्र के नाम सम्बोधन नहीं हुआ नहीं संसद का विशेष सत्र बुलाया ।
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