कर्म की सुचिता से उदित होता है भाग्य का मंगल-विमल कृष्ण जी
सुकर्म और नैतिक गुणों से मनुष्य को भगवान की अनुकंपा प्राप्त हुआ करती है
लालगंज, प्रतापगढ़। पिचूरा मिश्रौल में गुरूवार को श्रीमद भागवत कथा के शुभारंभ पर भगवान की महिमा का गुणगान सुनकर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध दिखे। कथाव्यास श्रीधाम अयोध्या के विमल कृष्ण शास्त्री जी महराज ने कहा कि भगवान की कथा को सुनने व ग्रहण करने से जीवन का पुण्य उदित हुआ करता है। उन्होने कहा कि श्रीमदभागवत कथा में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म के आधार पर भाग्य के सृजन का मार्ग संसूचित किया है। उन्होने कहा कि नियति को विधाता ही तय किया करता है। शास्त्री जी ने बताया कि सुकर्म और नैतिक गुणों से मनुष्य को भगवान की अनुकंपा प्राप्त हुआ करती है।
उन्होने कहा कि कलिकाल में श्रीराधेकृष्ण नाम का जप और कथा का अमृतपान जीवन की दशा और दिशा को सुमंगल बना दिया करता है। संस्कृत विद्वान आचार्य मनीष कृष्ण शास्त्री जी ने श्रद्धालुओं की ओर से व्यासपीठ का सम्मान किया। संयोजक आदित्य नारायण मिश्र एवं सत्य प्रकाश मिश्र ने भगवान द्वारिकाधीश का विधिविधान से पूजन अर्चन किया। इस मौके पर पं0 केदारनाथ मिश्र, हृदय नारायण मिश्र, फूलचंद्र पाण्डेय, रामप्रताप मिश्र, रामअभिलाष मिश्र, ज्ञानप्रकाश मिश्र आदि रहे।
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