कृष्ण और सुदामा की मित्रता अनुपम उदाहरण है जिससे सबक लेना चाहिए

थानापुर में भागवत सप्ताह संपन्

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ब्यूरो प्रयागराज। थानापुर  में चल रहे भागवत सप्ताह के अंतिम दिन  भागवत कार आचार्य यशोदा नंदन जी ने श्री कृष्ण और सुदामा की मित्रता की अनुपम  व्याख्या करते हुए बताया की राजा और रंक की मित्रता कैसी होनी चाहिए यह कृष्ण और सुदामा की मित्रता का बेमिसाल उदाहरण है मित्रता में ना कोई राजा होता है ना कोई दरिद्र। मित्रता  अनमोल चीज है जिसमे असमानता गरीबी अमीरी और पद का कोई महत्व नहीं रहता।
 
आचार्य जी ने कहा राजा द्रुपद ने राजा होने के अहंकार में द्रोणाचार्य जैसे परम बाल सखा का अपमान करके मित्रता पर कलंक लगाने का कार्य किया था जब  की श्री कृष्ण ने द्वारिका के राजा होकर सुदामा के  लिए जो कर दिखाया वह आज तक बेमिसाल है।क्योंकि कृष्ण में राजा का अहंकार नहीं आया था और सुदामा को वहीं बाल सखा वाला ही मित्र धर्म का पालन करते हुए उनके दरिद्रता का एहसास नहीं होने दिया जब की द्रुपद को राजा का अहंकार हो गया और मित्र धर्म का मजाक उड़ाते हुए द्रोणाचार्य को राजसभा से अपमानित करके भगा दिए थे ।जिसका परिणाम द्रुपद को बंधक  बन कर द्रोणाचार्य के कदमों में  क्षमा मांगना पड़ा था।
 
आचार्य ने भागवत सप्ताह के अंतिम दिन भागवत में वर्णित अनेक उदाहरण देकर भक्त गणों को जानकारी दी।भागवत यह सीख देती है कि जीवन का सार क्या है।न्याय अन्याय क्या है धर्म और अधर्म क्या है यदि मनुष्य जान ले तो कभी मनुष्य अपने जीवन में गलत कार्य नहीं कर सकता। भागवत सप्ताह के आयोजक मानिक चंद्र द्विवेदी तथा राजेन्द्र द्विवेदी द्वारा अपने पूर्वजों की स्मृति में यह आयोजन किया जो काफी सफल रहा।

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