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पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश मिश्र मटियारी के नेतृत्व में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव
शुकुल बाजार में ब्राह्मण समाज के अगुवा वा वरिष्ठ भाजपा नेता गिरीश चंद्र शुक्ला के नेतृत्व में मनाया गया भगवान परशुराम का जन्मोत्सव
अमेठी। भगवान परशुराम जयंती का पर्व क्षेत्र में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर धार्मिक अनुष्ठानों, शोभायात्राओं और पूजन-अर्चन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धर्म और परंपरा के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। गौरीगंज क्षेत्र में पूर्व विधायक चंद्र प्रकाश मिश्र ‘मटियारी’ के नेतृत्व में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के तहत हजारों की संख्या में लोगों ने एक विशाल रैली निकाली, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी।
रैली में शामिल श्रद्धालु भगवान परशुराम के जयकारों से वातावरण को भक्तिमय बना रहे थे। इसके उपरांत भगवान परशुराम की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान पूर्व विधायक ने कहा कि भगवान परशुराम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और धर्म की स्थापना के प्रेरणास्रोत हैं। उनके जीवन से हमें अन्याय के विरुद्ध खड़े होने की प्रेरणा मिलती है।
वहीं, विकासखंड शुकुल बाजार में भी भगवान परशुराम जयंती बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। ब्राह्मण समाज के अगुवा एवं वरिष्ठ भाजपा नेता गिरीश चंद्र शुक्ला व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता पंडित राम उंजेरे शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार सुशील कुमार मिश्रा, पंडित सतीश दास जी महाराज, उदय नारायण मिश्रा सहित अन्य भक्तगणों ने विधि विधान पूर्वक भगवान परशुराम जी का जन्मोत्सव मनाया। भगवान परशुराम के आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। भगवान परशुराम, जो कि महर्षि जमदग्नि के पुत्र एवं भगवान विष्णु के छठवें अवतार माने जाते हैं, ने सदैव धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए कार्य किया।
उनका जीवन त्याग, तपस्या और न्यायप्रियता का अद्वितीय उदाहरण है पंडित सतीश दास जी महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम भारतीय परंपरा में अद्वितीय स्थान रखते हैं। वे महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र तथा भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। परशुराम का जीवन धर्म, न्याय और तपस्या का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हुए अधर्म का नाश किया और समाज में संतुलन स्थापित किया। उनका “परशु” (फरसा) केवल शस्त्र नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की रक्षा का प्रतीक है।
कहा जाता है कि उन्होंने कठोर तप कर भगवान शिव से दिव्य अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए और उनका उपयोग सदैव धर्म की स्थापना के लिए किया। वे ज्ञान, शक्ति और विनम्रता के अद्भुत संगम हैं। आज भी परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य के मार्ग पर अडिग रहकर अन्याय का विरोध करना ही सच्चा धर्म है।
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