डोनाल्ड ट्रंप अनिश्चित और अप्रत्याशित राजनेता

अनिश्चित परिणामों से भरी ट्रंप के साथ वैश्विक देशों की कूटनीति

Swatantra Prabhat UP Picture
Published On

डोनाल्ड ट्रंप का राजनीतिक करियर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों और विरोधाभासों से घिरा हुआ भी रहा है, विशेषकर उनके कार्यकाल (2017–2021) के दौरान और वैश्विक तनावों के संदर्भ में उनके बयानों ने बार-बार यह संकेत दिया कि उनकी नीति और वक्तव्य अक्सर एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चलते दिखाई देते हैं, ट्रंप ने सत्ता संभालते ही अमेरिका पहले की नीति को प्राथमिकता दी, जिसका अर्थ था कि अमेरिका अपने हितों को सर्वोपरि रखेगा, इसी नीति के तहत उन्होंने ईरान न्यूक्लियर डील से 2018 में अमेरिका को अलग कर लिया, जबकि यह समझौता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जाता था।

इस फैसले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया और  ट्रंप ने एक ओर कहा कि वे युद्ध नहीं चाहते, वहीं दूसरी ओर उनके सैन्य फैसले इस दिशा में बढ़ते दिखे, यही विरोधाभास उनकी विदेश नीति की सबसे बड़ी पहचान बन गया, उत्तर कोरिया के संदर्भ में भी उनका रवैया इसी प्रकार का रहा, उन्होंने पहले किम जोंग-उन को लिटिल रॉकेट मैन बोल कर  धमकाया, फिर अचानक शांति वार्ता शुरू कर दी और 2018 में सिंगापुर शिखर सम्मेलन में ऐतिहासिक मुलाकात की, हालांकि इस कूटनीतिक पहल से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला, लेकिन उनके बयान लगातार बदलते रहे, कभी वे युद्ध की चेतावनी देते तो कभी दोस्ती की बात करते।

इसी तरह चिंता साथ उनका व्यापार युद्ध भी उनके बयानों का केंद्र रहा, उन्होंने चीन पर अनुचित व्यापारिक प्रथाओं का आरोप लगाते हुए भारी टैरिफ लगाए, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, वहीं दूसरी ओर वे कई बार शी जीन पिंग की प्रशंसा करते नजर आए, यह आदत उनकी नेतृत्व शैली का स्थायी तत्व बन गया, सिरियन सिविल वॉर के दौरान भी ट्रंप ने पहले अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा की, फिर अचानक सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया, 2017 और 2018 में उन्होंने सीरिया पर मिसाइल हमले किए, जबकि उन्होंने अपने चुनाव प्रचार में अमेरिका को अंतहीन युद्धों।से बाहर निकालने का वादा किया था।

अफगानिस्तान में भी उन्होंने तालिबान के साथ वार्ता शुरू की, लेकिन कई बार अपने ही फैसलों से पीछे हटते दिखाई दिए, इन सबके बीच उनकी बयानबाजी ने वैश्विक मंच पर असमंजस की स्थिति पैदा की, ट्रंप के वक्तव्यों की एक विशेषता यह रही कि वे अक्सर सोशल मीडिया, विशेषकर ट्विटर के माध्यम से अचानक और बिना कूटनीतिक भाषा के अपनी बात रखते थे, जिससे कई बार अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव और बढ़ जाता था, उदाहरण के तौर पर उन्होंने ईरान को फायर एंड फ्यूरी जैसी चेतावनी दी, वहीं कुछ ही समय बाद वार्ता की इच्छा भी जताई, यही तर्ज में रूस  के संदर्भ में भी दिखाई दी, जहां उन्होंने पुतिन साथ अपने संबंधों को सकारात्मक बताया, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्टों में रूस को खतरा बताया गया, इस विरोधाभास ने अमेरिकी राजनीति में भी गहरी बहस को जन्म दिया।

अप्रैल की भीषण गर्मी और अनियमित वर्षा से बदलता जीवन का संतुलन Read More अप्रैल की भीषण गर्मी और अनियमित वर्षा से बदलता जीवन का संतुलन

कुल मिलाकर ट्रंप का कार्यकाल यह दर्शाता है कि उनकी विदेश नीति और युद्ध से जुड़े बयान अक्सर रणनीतिक स्पष्टता के बजाय व्यक्तिगत शैली और तात्कालिक प्रतिक्रिया पर आधारित थे। एक ओर वे खुद को शांति का समर्थक बताते रहे और नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा भी जताते रहे, वहीं दूसरी ओर उनके कई फैसलों ने वैश्विक तनाव को बढ़ाया, यही कारण है कि उनके आलोचक उन्हें अनिश्चित और अप्रत्याशित नेता मानते हैं, जबकि समर्थक इसे उनकी अलग सोच और निर्भीक नेतृत्व का प्रतीक बताते हैं, लेकिन यह निर्विवाद है कि उनके बयानों और निर्णयों ने विश्व राजनीति में एक नई तरह की अनिश्चितता और अस्थिरता को जन्म दिया, जो आज भी वैश्विक कूटनीति में महसूस की जाती है

संजीव ठाकुर

होर्मुज की नाकेबंदी से टूटती अनगिनत उम्मीदें Read More होर्मुज की नाकेबंदी से टूटती अनगिनत उम्मीदें

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें