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हिमाचल प्रदेश सरकार पर कर्मचारी और पेंशनरों का दसहजार करोड़ बकाया
बहाना पर बहाना बनाती रही बीजेपी और कांग्रेस सरकारें - सेवा निवृत्त प्रोफेसर अशोक कुमार
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारी और पेंशनरों का दसहजार करोड़ बकाया सरकार पर है । यह पैसा कर्मचारी और पेंशनर्स दान में नहीं मांग रहे हैं। उनके तीस साल के मेहनत का पैसा है। जो सरकार दबा कर मौज कर रही है । और अपने चहेतों को पद चेयरमैन निगमो बोर्डों में बनाकर रेवड़ियां बाट रही है । लेकिन पेंशनर्स का पैसा देने का बहाना कभी प्राकृतिक आपदा पर तो कभी केन्द्र सरकार पर की हिमाचल का हक नहीं मिल रहा है। जब कि सरकार का कोई काम रूका नहीं है मंत्री के कार्यालय नये बन रहे हैं । गाडियां न ई खरीदी जाती है। उद्घाटन हो रहा हेलिकाप्टर भी हर रोज आसमान में उडता है।तब सरकार के पास धन की कमी नहीं होती है। बस वेतन और डीए का एरियर देने के लिए धन नहीं ।
सबसे बड़ा धोखा कर्मचारियों को पेंशनर्स को जयराम सरकार ने दिया वह सातवें वेतनमान को लागू करने में पांच साल का समय लिया और चुनाव से चार महीने पहले घोषणा किया वेतनमान देने का पर एक नये नोटिफिकेशन में दो हजार सोलह से जनवरी दो हजार बाईस के तक के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के हर तरह के नये वेतनमान के एरियर को रोक दिया। यह ऐसा सौतेला व्यवहार हिमाचल की पहली सरकार ने किया।जो इतिहास में दर्ज होगया और दो हजार बाईस फरवरी में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नये वेतनमान में एरियर दिया जा रहा है।
उस समय भाजपा की सरकार डबल इंजन की सरकार थी केन्द्र से भरपूर मदद मिल रहा था फिर भी किस वित्त सचिव के बहकावे में आकर गलत नोटिफिकेशन करके रोका गया जो आज की सरकार के लिए सिर दर्द हो गया है। जयराम ठाकुर चाहते तो उसी समय दो हजार सोलह से दो हजार बाईस के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स का भुगतान कर सकते थे। परन्तु उनको यह अनुमान हो गया था कि सरकार वापस नहीं सत्ता में आ रही है। तो आने वाली सरकार के ऊपर बोझ डाल दिया और यह सरकार तीन साल से प्राकृतिक आपदा से ही लड रही है। इनके लिए भुगतान न करने का सबसे सुन्दर सरल बहाना बन गया।
वर्तमान सरकार बस चुनावी रेवड़ी बांटने मे लगी है। अपने चुनावी घोषणा को पूरा करने में लगी हैं ।पेंशनर्स मरे या जीये सरकार को कोई सरोकार नहीं है। वेतनमान व डीए का एरियर न मिलने से हर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को कम से कम एक लाख से चार लाख रूपये सालाना व्याज का नुक़सान हो रहा है। भारत सरकार भी 2047का सपना जनता को दिखा रही है यह जनता जानती है कि सपना दिखाने वाला दो हजार सैंतालीस तक जिन्दा नहीं रहेगा नहीं वह सत्ता पर रहेगा तो हसीन सपनों की दुनिया बनाकर दिखाने का काम हर सत्ता दल करने लगा है।आम जनता सपने में नहीं हकीकत की जमीन पर चलती रहती है । वह सपना वहीं देखना चाहती है जो सच हो। उसके अपने पास जो संसाधन हैं उसी के अनुसार सपना देखती और पूरा करने में लगी रहती है। सरकार जो सपना दिखाती है नारा देती वह कभी पूरा होता नहीं है। यही हिमाचल की वर्तमान सरकार कर रही है ।
हिमाचल में कर्मचारियों और पेंशनर्स का दो गुट है एक सरकार का कांग्रेसी तो दूसरा समूह भाजपाई है।जिस कारण भी एरियर की लड़ाई कमजोर हो जा रही है ।एक गुट सरकार से एक मुश्त हर तरह का एरियर वेतनमान का और डीए का मांग रहा है। तो सरकार के चरण चुम्बक समूह किश्तों में मांग करने लगते हैं। सरकार भी दो समूहों को आपस में लड़ाने में यकीन करती है। आज जो भाजपा के समर्थक हैं वहीं समूह दो हजार बाईस में जो नोटिफिकेशन सरकार ने करके नये वेतनमान का एरियर दो हजार सोलह से दो हजार बाईस तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स का रोक तब सब मौन थे जयराम ठाकुर के चरणों में गिरे थे। वहीं समूह तीस मार्च को विधानसभा शिमला में धरना दिया और दस दिन के आश्वासन पर अपने अपने घर चले गये ।यहां यह कहना सही होगा। चलो वापस घर चले। सरकार से बातें हो गई।
हिमाचल के पेंशनर्स ने पेंशन दिवस पर घुमारवीं में बहुत भव्य स्वागत मुख्यमंत्री का किया था उनके सम्मान में कशिदे बहुत पढ़ें गये। हर नेता एक से बढ़कर एक अलंकृत शब्दों से मुख्यमंत्री का गुणगान कर रहा था म तालियां बजती रही थी। मुख्यमंत्री ने वही रटा-रटाया शब्द बोला अभी प्राकृतिक आपदा से तीन साल से लड रहे हैं जनता की जरूरतों को अभी पूरा करना है सड़क पानी और जिनके मकान नहीं है उनको पहले देना है ।सरकार इस स्थिति में नहीं है कि कर्मचारियों और पेंशनर्स को दसहजारा बकाया दे सके ।आप सरकार का सहयोग करे व्यवस्था परिवर्तन हो रहा है हम आत्म निर्भर हिमाचल बनाने में लगे।
सभी चरण चुम्बक नेता जो गुणगान घुमारवी में किये थे मौन हो गये।फिर सरकार ने बांट दिया कि सत्तर साल से पचहत्तर साल वालों को देंगे एक मुश्त तीन बार घोषणा किया। अब तो सरकार यह मान रही है एरियर की देनदारी और बढ़ रही है इस साल जो बजट पेश किया उसमें भी एरियर के लिए धन का प्रावधान नहीं है।बस एक आश्वसन है सरकार देगी पर समय तारीख नहीं बतायेगी अदालतों की तरह तारीख पर तारीख मिल रहाहै फैसला नहीं उसी तरह से सरकार का आश्वासन पर आश्वासन पर एरियर नहीं मिला न मिलने की अभी उम्मीद है।अब तो सरकार के दिन भी गिनती के महीने के बच गये है।
सरकार बदलने पर भी यह उम्मीद कदापि कर्मचारी और पेंशनर्स न रखें की भाजपा आयेंगी तो देदेगी । वह भी आपको विकसित हिमाचल दोहजार सैतीस दिखायेंगे और एरियर लेकर दो हजार सैतीस तक जायेंगे । कारण तब तक आठवां वेतनमान भी केन्द्र का लग जायेगा।फिर हिमाचल में संकट रहेगा वित्त का।संकट केवल माननीयों को नहीं होता है उनका वेतनभत्ता बढ़ता रहेगा एक दिन का विधायक अस्सी हजार से ऊपर पेंशन लेगा पर तीस साल का कर्मचारी बिना पेंशन घर जायेगा।
गजब का देश में लोकतंत्र जनता जिसे विधायक सासद बनाती है उससे सवाल करना भूल गई कि आपको क्यों पेंशन चाहिए और हमारे लड़के जो सरकारी और निजी क्षेत्रों में तीस साल सेवा देते हैं उनको आपके बराबर पेंशन क्यों नहीं मिले। सम्विधान में एक नया संशोधन हो कि सांसद विधायक की तरह ही पेंशन मिले सभी कर्मचारियों को वह सरकारी हो या गैर सरकारी क्षेत्र। जिस दिन जनता यह सवाल लेकर सड़क पर आयेगी तभी देश में बदलाव सही मायने में आयेगा पर हम जनता दलीय जनता बने है जातिय जनता है धार्मिक जनता है सरकार से सवाल नहीं पूछ रहे हैं क्यो हमारे लड़कों को सामाजिक सुरक्षा के रुप में पेंशन चिकित्सा नहीं मिल रहा है।
सरकार दस अप्रैल को उन समूहों के नेताओं को पुनः वार्तालाप के लिए शिमला बुलाकर वार्ता करने वाली है पर जब अप्रैल बीत गया । सरकारने बुलाया नहीं। बात नहीं हुआ। भारत में हर सरकार का यही रवैया आन्दोलन को कमजोर करना है या कुचलना है तो आन्दोलन कर रहे संगठन से बात मत करो लम्बा चलने दो फिर थक कर हार कर झूक जायेंगे और आन्दोलन समाप्त हो जायेगा।यही हिमाचल सरकार ने किया। कर्मचारियों और पेंशनर्स का दो गुट बना दिया है।जिससे एरियर के भुगतान को दो हजार सत्ताईस तक न देना हो और सरकार जनता में जो चुनाव के समय वायदे किये थे हर महिला को पन्द्रह सौ हर माह उसको पूरा करके पुनः सत्ता वापसी करें। लेकिन यह नहीं पता हिमाचल में पेंशनर्स बहुत है वह चुनाव में एक निर्णायक भूमिका में रहते हैं।
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