किसान के बेटे ने बदली तकदीर, पिछड़े बहुल तराई क्षेत्र के अंकुर सिद्धार्थ बने नायब तहसीलदार

छात्र-छात्राओं के लिए यह संदेश है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है

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बलरामपुर( रमईडीह)- विकास खण्ड बलरामपुर के बलुई ग्रामीण और तराई बहुल क्षेत्र से एक ऐसी सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने न सिर्फ पूरे इलाके का मान बढ़ाया है, बल्कि संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए नई राह भी दिखाई है। ग्राम पंचायत बलुई निवासी किसान परिवार के होनहार पुत्र अंकुर सिद्धार्थ , पिता अरविन्द कुमार, का चयन प्रतिष्ठित नयाब तहसीलदार के पद पर हुआ है। अंकुर की इस ऐतिहासिक सफलता की खबर मिलते ही गांव, क्षेत्र और जनपद में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों का उनके घर पर तांता लग गया। अध्यापक हरीशचंद्र लेखपाल श्रीनिवासन,राजू यादव, श्याम सुंदर , अभिनव,कमल अधिवक्ता महेंद्र तिवारी विधायक पलटूं राम सहित दर्जनों ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और शिक्षकों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया है।
 
 
साधारण पृष्ठभूमि, असाधारण उपलब्धि
अंकुर सिद्धार्थ एक साधारण किसान परिवार से आते हैं, जहां संसाधनों की कमी हमेशा चुनौती बनी रही। बावजूद इसके उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। सीमित सुविधाओं और ग्रामीण परिवेश में रहकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत और लगन के दम पर किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
 
 
गांव से शुरू हुई सफलता की यात्रा
अंकुर सिद्धार्थ की प्रारम्भिक शिक्षा कक्षा 1 से 5 तक किसान आदर्श बाल विद्या मंदिर रमई डीह से हुई, जहां से उन्होंने अपनी नींव मजबूत की। इसके बाद उन्होंने कक्षा 6 से कक्षा 12 तक नवोदय विद्यालय बलरामपुर से उत्तीर्ण की। बाद उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से आई, आई,टी बीटेक की डिग्री हासिल की। शिक्षा के हर पड़ाव पर उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर आगे बढ़ते रहे।
 
संघर्ष, मेहनत और संकल्प की मिसाल
अंकुर की सफलता के पीछे वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और मजबूत संकल्प है। ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई के दौरान कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल को अवसर में बदलते हुए अपने सपनों को साकार किया। युवाओं के लिए प्रेरणा अंकुर सिद्धार्थ की यह उपलब्धि आज क्षेत्र के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों के छात्र-छात्राओं के लिए यह संदेश है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।
 
गांव में जश्न का माहौल
अकुर के चयन की खबर मिलते ही उनके गांव बलुई सहित पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल है। लोगों ने मिठाई बांटकर अपनी खुशी का इजहार किया और अंकुर सिद्धार्थ के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ग्रामीणों का कहना है कि अंकुर ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी शहर या संसाधनों की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही दिशा और मेहनत से हर सपना साकार किया जा सकता है।

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