IAS Success Story: 6 बार असफल, 7वें प्रयास में बनीं IAS: पढ़ें पल्लवी वर्मा की प्रेरक कहानी

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IAS Success Story: एक लड़की, जिसके सपने बड़े थे, लेकिन रास्ता आसान नहीं था। जिंदगी ने उसे बार-बार परखा। मां कैंसर से जूझ रही थीं, घर में चिंता और दर्द का माहौल था। ऐसे हालात में ज्यादातर लोग टूट जाते हैं, लेकिन पल्लवी वर्मा ने दर्द को अपनी ताकत बना लिया। आंसुओं को इरादों में बदल दिया और ठान लिया कि अफसर बनकर ही रहेंगी।

इंदौर से शुरू हुआ सफर

मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली पल्लवी वर्मा ने बायोटेक्नोलॉजी में ग्रेजुएशन किया। वह अपने परिवार की पहली लड़की थीं, जो यूनिवर्सिटी तक पहुंचीं। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने करीब 10-11 महीने चेन्नई में सॉफ्टवेयर टेस्टर के तौर पर नौकरी की। लेकिन उनका मन कुछ बड़ा करने का था। तभी उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला लिया और यूपीएससी  की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी।

2013 से शुरू हुई संघर्ष की कहानी

पल्लवी ने 2013 से खुद को पूरी तरह UPSC की तैयारी में झोंक दिया। 2013 से 2020 के बीच उन्होंने कई बार परीक्षा दी। तीन बार प्रीलिम्स में असफल रहीं, एक बार मेन्स में उम्मीद टूटी और तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचकर भी चयन नहीं हो पाया। लगातार 6 असफलताओं ने उनका हौसला जरूर परखा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

मां की बीमारी के बीच भी नहीं टूटा हौसला

तैयारी के दौरान उनकी मां कैंसर से जूझ रही थीं और कीमोथेरेपी से गुजर रही थीं। घर का माहौल बेहद भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण था। अपने माता-पिता को दर्द में देखना आसान नहीं था, लेकिन पल्लवी ने खुद को संभाला। उन्होंने दर्द को कमजोरी नहीं, बल्कि प्रेरणा बनाया। माता-पिता ने भी उनकी लगन देखकर पूरा समर्थन दिया।

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बदली रणनीति और मिली सफलता

बार-बार की असफलताओं के बाद पल्लवी ने 2020 में अपनी रणनीति बदली। टाइम-टेबल बनाकर नियमित रूप से लाइब्रेरी में पढ़ाई शुरू की। अपनी कमजोरियों को पहचाना और खास तौर पर आंसर राइटिंग पर ध्यान दिया। मेहनत रंग लाई और 7वें प्रयास में उन्होंने 340वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उनका IAS बनने का सपना पूरा हो गया।

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उम्मीदवारों के लिए पल्लवी की सलाह

पल्लवी का मानना है कि हालात चाहे जैसे भी हों, आगे बढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए। तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को वह नियमित प्रैक्टिस, आंसर राइटिंग और आत्मविश्लेषण की सलाह देती हैं। उनका कहना है कि अपनी कमजोरियों को पहचानकर सुधार करना ही सफलता की असली कुंजी है।

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संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l 

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