ग्राम पंचायत बरतनिया के ग्राम प्रधान प्रेमा ने फर्जी भुगतान कराने में मारी बाजी
सचिव व मनरेगा एपीओ ने भी ग्राम पंचायत बरतनिया के भ्रष्टाचार में लगाई डुबकी ग्राम प्रधान प्रेमा ने फर्जी एमबी के सहारे सरकारी धन को लूटने में दिख रही सफल
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बस्ती। बस्ती जिले के कुदरहा विकास खंड ग्राम पंचायत बरतनिया की महिला ग्राम प्रधान प्रेमा ने मनरेगा कार्य के नाम पर फर्जी भुगतान कराने में बाजी मारी है जिसमें रोजगार सेवक सर्वजीत ने भी अहम भूमिका निभाई है । रोजगार सेवक सर्वजीत ने उच्च अधिकारियों को गुमराह करके मनरेगा कार्य के नाम पर फर्जी मस्टर रोल जारी करवाया था और फर्जी मस्टर रोल पर गर्मी महीने में मनरेगा कार्य में प्रयोग पुराने फर्जी फोटो से लगातार 14 दिनों तक मनरेगा मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाकर ऑनलाइन मस्टर रोल पूर्ण किया था । तकनीकी सहायक / जे ई ने अपना मुंह मांगा सुविधा शुल्क लेकर मनरेगा कार्य के नाम पर फर्जी एमबी कर दिया है ।
फर्जी एमबी होने पर सचिव ने भी भुगतान के लिए पूर्ण फर्जी फाइल पर हस्ताक्षर कर दिया हैआपको बता दें कि प्रदेश सरकार द्वारा मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रत्येक ब्लॉक पर मनरेगा एपीओ की तैनाती की गई है ताकि ग्राम पंचायतों में हुए मनरेगा कार्यों में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो लेकिन मनरेगा एपीओ ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों की गुणवत्ता परखने के बजाए मनरेगा कार्यों में हुए फर्जीवाड़ा के हिसाब से अपने कमीशन की परख करते हैं और ग्राम प्रधान से लेनदेन करके सरकारी धन को लूटवाने में तनिक सा भी चूक नहीं करते हैं । मनरेगा एपीओ का मुख्य उद्देश्य मनरेगा कार्यों के नाम पर ग्राम प्रधानों से मोटी रकम वसूल करना है ।
सूत्रों की माने तो ग्राम पंचायत बरतनिया में मनरेगा कर के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा हुआ है और रोजगार सेवक ,सचिव ,तकनीकी सहायक / जेई व मनरेगा एपीओ की मिली भगत से महिला ग्राम प्रधान प्रेमा लूट खसोट करने में सफल है । फर्जी मनरेगा कार्य का ऑनलाइन मस्टर रोल 22 दिसंबर को पूर्ण हुआ था और सचिव , टीए व मनरेगा एपीओ की मदद से 26 दिसंबर को भुगतान के लिए फाइल की फीडिंग हो गई है जो लगभग 03 लाख रुपए का भुगतान है । ग्राम पंचायत बरतनिया बिना मनरेगा कार्य कराये भुगतान के लिए फर्जी फीड फाइल को लेकर जिले में तरह - तरह की चर्चाएं चल रही है । अब देखना यह है कि खंड विकास अधिकारी कुदरहा आलोक कुमार पंकज ग्राम पंचायत बरतनिया के ऑनलाइन भुगतान हेतु फीड फाइल का फर्जी भुगतान रोक पाते है या नहीं ? अथवा सचिव, टीए व मनरेगा एपीओ की तरह लेनदेन करके मामले को रफा-दफा दफा कर देंगे ।
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