ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई क्रांति, अब 100 नहीं 125 दिन के रोजगार की मिलेगी गारंटी

जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन; सीडीओ जागृति अवस्थी ने नए अधिनियम की बारीकियों से कराया रूबरू

 ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई क्रांति, अब 100 नहीं 125 दिन के रोजगार की मिलेगी गारंटी

अजित सिंह/राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट) 

सोनभद्र /उत्तर प्रदेश-

 26 दिसम्बर, 2025 ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन अधिनियम-2025 जनपद सोनभद्र में नई उम्मीदें लेकर आया है। मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जागृति अवस्थी के नेतृत्व में आज जनपद की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को उनके नए कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि इस नए अधिनियम ने पुराने मनरेगा (MGNREGA) के ढांचे को और अधिक सुदृढ़ कर दिया है। अब ग्रामीण श्रमिकों को वर्ष में 100 के स्थान पर 125 दिन के अनिवार्य रोजगार की गारंटी मिलेगी। पुराने नियमों की जटिलताओं को खत्म कर दिया गया है। अब यदि काम मांगने पर नहीं मिलता, तो स्वतः बेरोजगारी भत्ता देय होगा। मजदूरी भुगतान में देरी होने पर श्रमिकों को प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा दिया जाएगा, जिससे सरकारी मशीनरी की जवाबदेही तय होगी।

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डी.सी. उप श्रमायुक्त स्वत रोजगार ने जानकारी दी कि पूरी प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए पंचायत निर्णय ऐप का उपयोग किया जा रहा है। ग्राम सभाओं की जियो-टैग फोटो और रियल-टाइम वीडियोग्राफी ऐप पर अपलोड की गई, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। इस अधिनियम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि अब विकास का मॉडल ऊपर से नहीं थोपा जाएगा। ग्राम पंचायतें अपनी विकास योजना खुद तैयार करेंगी। कार्यों को जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु परिवर्तन से बचाव जैसी श्रेणियों में बांटा गया है।

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इन सभी कार्यों को विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक पर दर्ज किया जाएगा ताकि कार्यों के दोहराव पर रोक लग सके। किसानों और कृषि क्षेत्र के हितों का ध्यान रखते हुए अधिनियम में विशेष प्रावधान किए गए हैं। बुवाई और कटाई के मुख्य सीजन (कुल 60 दिन) के दौरान सरकारी कार्य बंद रहेंगे, ताकि खेती के लिए श्रमिक उपलब्ध रहें। अधिनियम के लागू होते ही श्रमिकों को बढ़ी हुई नई मजदूरी दरों का सीधा-सीधा लाभ मिलेगा।

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ग्राम सभाओं के दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चल रही योजनाओं के कार्य प्रभावित नहीं होंगे और वे सुचारू रूप से चलते रहेंगे।

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