ईमानदार साहब के डी सी व सर्वेयर कर रहे ₹ 30000 प्रति आवास अवैध वसूली--अंजू, 

नगर पंचायत अध्यक्ष भीरा डीसी विनय श्रीवास्तव, सर्वेयर आशीष त्रिवेदी की तिकड़ी द्वारा पोषित दलालों से अवैध वसूली कराए जाने के सभासदो ने लगाए आरोप

ईमानदार साहब के डी सी व सर्वेयर कर रहे ₹ 30000 प्रति आवास अवैध वसूली--अंजू, 

सुविधा शुल्क न देने पर डीसी विनय श्रीवास्तव द्वारा रोक दी जाती है लाभार्थी की दूसरी किस्त या फिर दूसरे जिओ टैग में कर दिया जाता अपात्र-किशन

लखीमपुर खीरी।  भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी नवगठित नगर पंचायत भीरा में मची खुली लूट रुकने का नाम ही नहीं ले रही है। भ्रष्टाचार के चलते भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में प्रति आवास ₹30000 की अवैध वसूली किए जाने का मामला जन चर्चा का विषय बना है । पीएम आवास में हो रही अवैध वसूली और नगर पंचायत भीरा में कराए जा रहे मानक विहीन निर्माण कार्यों में सड़क व नाला निर्माण तथा साफ-सफाई के नाम पर किए जा रहे दोहरे व्यवहार से आहत कई सभासदों ने उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार बृजेश पाठक से मिलकर मामले से अवगत कराते हुए जांच कराकर कार्यवाही किए जाने की मांग की है।
 
डिप्टी सीएम को दिए गए शिकायती पत्र में सभासद अंजू ,किशन ,राजू, सतीश आदि लोगों ने नगर पंचायत अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी भीरा नगर पंचायत वअरिनेम कंसलटेंट कंपनी के डीसी विनय श्रीवास्तव सर्वेयर सहित उक्त लोगों द्वारा पोषित दलालों द्वारा प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में आवास दिलाने के नाम पर ₹30000 प्रति आवास की दर से वसूली किए जाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। सभासदों द्वारा उपमुख्यमंत्री को दिए गए शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि डीसी विनय श्रीवास्तव द्वारा सुविधा शुल्क न मिलने पर अगली किस्त के जियो टैग में लाभार्थी को अपात्र कर देने की धमकी दी जाती है तथा अन्य कई मामलों में दूसरी किस्त का पैसा रोक दिया गया है।
 
सभासद वार्ड संख्या एक अंबेडकर नगर  की सभासद अंजू, वार्ड संख्या दो शिवनगर के सभासद, किशन, वार्ड संख्या 3 अयोध्या नगर के सभासद राजू ,व वार्ड संख्या 5 के किसान नगर के सभासद सतीश द्वारा जब इस मामले की शिकायत परियोजना अधिकारी डूडा डॉक्टरअजय कुमार सिंह से कर जानकारी ली तो उन्होंने कहा सभी का जिओ टैग हो गया है ।जबकि हकीकत की जमीन पर बहुत से पात्र लाभार्थी आज भी वंचित देखे जा सकते हैं । चोर चोर मौसेरे भाई की तर्ज पर एक दूसरे की काली करतूत पर पर्दा डालते देखे जा सकते हैं।
 
सभासदों की जुबानी सत्य माने तो डीसी विनय श्रीवास्तव के द्वारा भी पहली किस्त का 50000 मिलने के बाद जो लाभार्थी ने सुविधा शुल्क नहीं दी उसे दूसरी किस्त के जिओ टैग में पात्र होते हुए भी फेल कर दिया जाता है। और अन्य माध्यम से दूसरी किस्त देने से रोका जा रहा है ।यह सारा खेल अपने को जिले का सबसे ईमानदार बताने वाले परियोजना अधिकारी डॉक्टर अजय कुमार सिंह के संरक्षण में खेले जाने के आरोप लाभार्थियों सहित सभासदों द्वारा लगाया जा रहे हैं ।यह पहला मामला नहीं है  अभी गत माह इसी भीरा नगर पंचायत में कब्रिस्तान और खाद के गड्ढों के लिए आरक्षित सरकारी जमीन पर मोटी रकम वसूल करके सैकड़ो आवास स्वीकृत किए जाने का मामला काफी तूल पकड़ा था। और आवास लाभार्थियों के खातों पर होल्ड भी लगाया गया था।
 
जिसमें परियोजना अधिकारी डूडा द्वारा जानकारी लेने पर बताया गया था कि इनमें से कई आवासो के लाभार्थियों से पैसे की रिकवरी कराई जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना महज दलालों और डूड़ा के परियोजना अधिकारीद्वारा संरक्षित डीसी विनय श्रीवास्तव व सर्वेयर आशीष त्रिवेदी तथा उनके द्वारा पोषित दलालों तथा अधिशासी अधिकारी व नगर पंचायत अध्यक्ष भीरा की कामधेनु बनकर रह गई है। जिससे पात्र आज भी लाभ से वंचित हैंऔर अपात्र की चांदी कट रही है ।जिसके चलते पीएम आवास योजना शहरी हकीकत के धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकार की साख पर बटटा भी लग रहा है।
 
इसी भ्रष्टाचार को लेकर सभासदों ने मोर्चा खोलते हुए मामले की लिखित शिकायत योगी सरकार के तेज तर्रार डिप्टी सीएम से मिलकर करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराकर कार्यवाही किए जाने की मांग की है। अब देखना यह है कि जनाब द्वारा उक्त मामले पर क्या एक्शन लिया जाएगा ।अवैध वसूली में लगे क्या कथित दलालों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी या फिर यूं ही खुला खेल फर्रुखाबादी चलता रहेगा और डिप्टी सीएम को की गई शिकायत को भी मंडलायुक्त के जनता दर्शन में दी गई शिकायत की तरह शिकायत की जांच कराए बगैर ही रददी की टोकरी में दफन कर दिया जाएगा।
 
भ्रष्टाचार के खुलासे के डर से नहीं कराई जा रही शिकायतों की जांच
प्रधानमंत्री शहरी आवासों के नाम पर भारी भरकम धनराशि बतौर रिश्वत लेकर पात्रों और शहरी सीमा से बाहर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रेवड़ी की तरह आवास दिए गए तो दर्जनों ऐसे आवास भी दिये गये जिनके पहले से आलीशान मकान बने थे। और तो और कई नो लैंड स्पेस वाले लोगों व50000 रूपये मासिक सैलरी उठा रहे सरकारी कर्मचारी गणों सहित पति और पत्नी दोनों के नाम आवास दिए जाने का मामला सामने आया है ।हद तो तब हो गई जब सभी फर्जी जियोटैग दिखाकर कई आवासो का पैसा निकाल लिया गया। और डीसी सर्वयरों ने मिलकर  बाटकर हजम कर लिया गया।
 
आवास आज तक नहीं बनाए गए। उक्त सभी की लिखित शिकायत जिला अधिकारी खीरी से कीगई कोई कार्यवाही नहीं हुई। उसके बाद माह मार्च में मंडलायुक्त द्वारा जनपद में किए गए जनता दर्शन में पुनः प्रार्थना पत्र दिया गया ।जिसमें ईओ नगर पालिका एवं परियोजना अधिकारी डूडा को संयुक्त रूप से जांच करने के आदेश दिए गये थे ।आज तक कोई जांच नहीं की जा रही है। यदि मामले की कराई जाए निष्पक्ष जांच तो कई करोड़ रुपए के सरकारी धन के दुरुपयोग किए जाने व रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार एवं फर्जी वाडा के खेल का खुलासा होना तय है ।और परियोजना अधिकारी डूडा से लेकर आउटसोर्सिंग कंपनी के सर्वेयरों एवं डीसी सहित सीएलटीसी के ऊपर गाज गिरना तय होगा ।शायद इसीलिए मामले की जांच कराए जाने की बजाय मामले को दबाया जा रहा है।
 
 

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