अवैध आतिशबाजी ने ले लील ली कई जिंदगियां

ग्राम सहरावां में होता है मौत का अवैध कारोबार

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आज भी बदस्तूर जारी है अवैध आतिशबाजी का खेल

पहले भी कई हादसे परिवार में हो चुके हैं

अय्यूब का स्वयं के हाथ की उंगलियां उड़ चुकी आतिशबाजी से

एक मासूम बच्चे का चेहरा खराब कर दिया अवैध आतिशबाजी ने

सगी भाभी रुकसाना के कुछ वर्ष पूर्व हुए धमाके में उड़ चुके परखच्चे 

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आशाखेडा में सगे साले की मौत हो चुकी गोला बारूद से

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उन्नाव।

जैसे जैसे सरकार अवैध गोला बारूद पर प्रतिबंध लगा रही है वैध लाइसेंस के नियमो को कठोर कर रही है वैसे वैसे लोगो में आतिशबाजी का चलन बढ़ता जा रहा है। बात यहां तक पहुंच चुकी है कि यदि छोटी से छोटी भी कोई खुशी की बात हो तो लोग हजारों रुपए की आतिशबाजी गोला बारूद को धुंए में उड़ा देते है। ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में लोग अपनी और अपने परिवार की जिंदगी खतरे में डालकर अवैध आतिशबाजी का काम कर रहे हैं जबकि उनकी अप्रशिक्षित कार्यशैली और मानकों के विरुद्ध गोला बारूद के निर्माण ने कइयों की जिंदगी छीन ली है उसके बावजूद लोग बाज नहीं आते और न ही इस ओर प्रशासन ही कोई ठोस कदम उठाता है।

        आपको बता दें थाना सोहरामऊ अंतर्गत असोहा ब्लॉक की ग्राम सभा सहरावां में मो. अय्यूब पुत्र मोहम्मद अहमद(मुल्ला जी) अपने घर पर ही अवैध आतिशबाजी का काम करता है बताया जाता है कि घर पर ही खतरनाक बमों का निर्माण किया जाता है ग्रामीणों के मुताबिक बमों में इतनी शक्ति होती है यदि किसी नए मकान में मार दिया जाए तो पूरा मकान एक क्षण में धराशाई हो जायेगा। जिसका जीता जागता उदाहरण कुछ वर्षो पूर्व दीपावली के पूर्व इन्ही बमों के कारण उक्त के घर में एक जोरदार धमाका हुआ था जिसकी गूंज लगभग पांच किलोमीटर की रेंज में गूंजी थी प्रत्यक्ष दर्शियों की माने तो धमाका इतना जोरदार था मानो धरती में भूकंप सा आ गया हो मोहल्ले के लोगों के मकान हिल गए थे कुछ के तो घर के दरवाजे धमाके की वजह से ही टूट गए थे

जिस धमाके में अय्यूब की भाभी रुकसाना के परखच्चे उड़ गए थे आधे से ज्यादा शरीर धमाके में गायब हो गया था जिसके शरीर के लोथड़े दूर दराज लोगों की घरों की छतों पर पाए गए थे घर की आरसीसी छत के भी परखच्चे उड़ गए थे। जिसमे उस समय थाना पुलिस से सेटिंग गेटिंग कर जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सेटिंग गेटिंग कर बच गए थे। उसके बावजूद भी उक्त लोगों ने इस अवैध काम को नहीं छोड़ा जिसका अंजाम ये हुआ लगभग दो वर्ष पूर्व लखनऊ के कस्बा बिजनौर में एक बारात में आतिशबाजी दगाने से उक्त अय्यूब के एक हाथ की कुछ उंगलियां उड़ गई जिसका इलाज ट्रॉमा सेंटर लखनऊ में हुआ। कुछ वर्ष पूर्व गांव के ही कमल सोनी के परिवार की बारात में आतिशबाजी ऐसी छुड़ाई कि वहां मौजूद एक मासूम बच्चे का पूरा चेहरा ही झुलस गया। इन सभी घटनाओं के पहले इनके ही रिश्तेदार मृतक रुकसाना का सगा भाई भी ग्राम आशाखेड़ा में गोला बारूद निर्माण के दौरान हुए धमाके में अपनी जान गंवा चुका था जिसके बाद उनका लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था

पर यहां तो बिना किसी वैध लाइसेंस के ही इतने बड़े हादसे हो गए और आज भी उक्त लोग ऐसे खतरनाक कार्य से बाज नहीं आते पूछने पर बताते हैं कि इस काम में इतना फायदा है की दो महीने कमाओ और पूरे साल खाओ। यहां तक कि दीपावली पर्व पर अवैध आतिशबाजी से पूरी सहरावां बाजार आशना हो जाती है जिसे कोई रोकने वाला नही रहता। यदि बारूद का ये अवैध खेल जल्द न रोका गया तो भविष्य में कोई बड़ी घटना घट सकती है। सवाल ये उठता है कि लोगों की जिंदगी से खेलने का अधिकार आखिर इन लोगों को कौन देता है। शादी बारातों में ऐसे अनुभवहीन और अशिक्षित बिना लाइसेंसधारी लोगों को आतिशबाजी छुड़ानी चाहिए?

 

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