राष्ट्रवाद
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11जून को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती है!इस अवसर पर यह आलेख है
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By Abhinav Shukla
शाहजहाँपुर की मिट्टी ने 11 जून 1897 को मुझे जन्म दिया था। माँ का नाम मूलमती, पिता का नाम मुरलीधर। घर गरीब था, पर सीना गर्व से भरा था। दादा ग्वालियर से अकाल के दिनों में भागकर यहाँ आए थे।...
स्वाधीनता संग्राम में अमर नाम है राम प्रसाद बिस्मिल का
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By Abhinav Shukla
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में वैचारिक चेतना और सशस्त्र क्रांति का एक ऐसा अनूठा संगम देखने को मिलता है जिसने दमनकारी ब्रिटिश सत्ता की नींव हिलाकर रख दी थी। इस अद्वितीय संगम के सबसे प्रखर प्रतीक पुरुष थे अमर...
भारतवर्ष की गुरु-शिष्य सनातनी परंपरा
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By Swatantra Prabhat UP
राष्ट्रीय चरित्र और राष्ट्रवाद शालाओं की बुनियादी शिक्षा कक्षाओं और गुरु और शिष्य परंपरा के साथ देश के प्रति समर्पण के भाव से प्रस्फुटित होता हैl राष्ट्रवाद राष्ट्र की रक्षा ,अखंडता एवं सशक्तिकरण नागरिकों के भाग्य को संरक्षित कर सुदृढ़...
राष्ट्रवाद का सबसे जटिल विरोधाभासी संक्रमण काल
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By Swatantra Prabhat UP
वर्तमान समय में राष्ट्रवाद अपने सबसे जटिल, विरोधाभासी और बहुअर्थी दौर से गुजर रहा है, यह वह राष्ट्रवाद नहीं रह गया है जो स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान त्याग, नैतिक साहस, संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समरसता का प्रतीक था, बल्कि यह...

