स्वतंत्र प्रभात लेख

कुसंगति त्यागें धर्मबुद्धि जागे जीवन बने उज्ज्वल और संस्कारित

मनुष्य का जीवन संगति से निर्मित होता है। जैसा वातावरण मिलता है वैसा ही मनुष्य का स्वभाव बनता जाता है। प्राचीन नीतिकारों ने स्पष्ट कहा है कि अच्छे और बुरे लोगों का प्रभाव मन पर अवश्य पड़ता है। आम और...

हनुमान जयंती: भक्ति, शक्ति और समर्पण का अद्भुत संगम

महेन्द्र तिवारी हनुमान जयन्ती का पावन पर्व हिंदू धर्मानुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी उत्सव है। यह दिन भगवान श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो शक्ति, भक्ति,...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

बातें बची हैं, पर बातचीत क्यों खत्म हो रही है?

कृति आरके जैन आज हमारे पास शब्दों की कोई कमी नहीं है, कमी है उस सच्चाई, उस गहराई और उस आत्मीय स्पर्श की, जो शब्दों को साधारण ‘बात’ से उठाकर सच्ची  बातचीत  में बदल देता है। हम...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

अनुपम अद्वितीय विलक्षण नेतृत्व क्षमता के धनी हैं नरेंद्र मोदी 

मनोज कुमार अग्रवाल     राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तपस्थली से तप कर निकले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत की राजनीति में सबसे कुशल अपराजेय नेतृत्वकर्ता हैं वह अपने विरोधियों यहां तक की अपनी पार्टी और सहयोगी दलों के प्रतिस्पर्धियों की तमाम चालों...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

स्त्री शिक्षा, सुरक्षा पर गंभीर विमर्श की आवश्यकता

किसी भी लोकतांत्रिक समाज की प्रगति का आकलन उसकी आधी आबादी अर्थात स्त्रियों की स्थिति से किया जाता है। यह तथ्य आज केवल विचार नहीं बल्कि वैश्विक विकास सूचकांकों का आधार बन चुका है। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में स्त्री...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

सेवा का सूर्योदय, इतिहास का सूर्यास्त नहीं: मोदी ने रचा 'अमर महाकाव्य'

जब सेवा केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि जीवन का सर्वोच्च उद्देश्य बन जाए, तब हर कदम इतिहास की सुनहरी धारा में अंकित हो जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वह अद्वितीय और प्रेरक शिखर छू लिया, जो पहले...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

धार्मिक स्थलों को क्यों नही मिलती बंदरों से मुक्ति

अशोक मधुप धार्मिक स्थलों को बंदरों से क्यों नही मिलती मुक्ति। सबसे बड़ा  यक्ष  प्रश्न  यह है कि इन स्थानों पर आने वाले श्रृद्धालु  कब तक इनके आंतक झेलते  रहेंगे? कब तक इनका  शिकार होते  रहेंगे?हाल में राष्ट्रपति द्रोपदी...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

बिहार में मजदूरों का लिंक्डइन?

महेन्द्र तिवारी क्या मजदूरों का भी लिंक्डइन हो सकता है? ये सवाल सुनकर कई लोग आश्चर्य से भौहें चढ़ा लेंगे। लेकिन बिहार के दरभंगा जिले के चंद्रशेखर मंडल ने न सिर्फ ये सवाल उठाया, बल्कि इसे हकीकत में...
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ईद का सच – खुशी बाँटने में मिलती है, रखने में नहीं

प्रो. आरके जैन “अरिजीत”   ईद-उल-फ़ित्र केवल एक सामान्य उत्सव नहीं, बल्कि आत्मसंयम, धैर्य और आध्यात्मिक शक्ति की सर्वोच्च विजय का अनुपम प्रतीक है।  रमज़ान की तपस्या ने शरीर को शुद्ध किया, मन को स्थिर और अडिग बनाया...
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