न्याय में देरी
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मुकदमा दर्ज होना ही सजा क्यों बन जाता है?
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By हर्षिता यादव
Rajeev Shuklaकिसी भी लोकतांत्रिक समाज में कानून का पहला उद्देश्य नागरिकों को सुरक्षा देना और न्याय उपलब्ध कराना है। शिकायत दर्ज होना इसी न्याय-व्यवस्था की एक आवश्यक प्रक्रिया है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब किसी व्यक्ति के...
संपादकीय पेज के लिए आलेख
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By Swatantra Prabhat UP
अंतर्राष्ट्रीय दबाव बेरोजगारी असमानता से जूझती आज़ादी ! मनोज कुमार अग्रवाल इन दिनों देश आजादी की 80वीं वर्षगांठ का जशन मना रहा है। हुक्मरानों के आह्वान पर देश में घर घर तिरंगा फहराया गया । राजपथ से लेकर जनपथ तक...
फर्जी मुकदमों की बढ़ती चुनौती: एससी-एसटी और पॉक्सो कानूनों के कथित दुरुपयोग पर उठे गंभीर सवाल
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By Swatantra Prabhat
भारतीय न्याय व्यवस्था में देरी तो है ही पर इसके साथ बहुत से मामले ऐसे हैं जिनका दुरुपयोग बड़ी तेजी से हो रहा है। हम बात कर रहे हैं एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो मामलों की जिनमें आदमी अगर सतर्क नहीं...
मुकदमों की पेंडिंग लिस्ट बढ़ने का सबसे बड़ा कारण जजों की संख्या है.।
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By Swatantra Prabhat
स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में केवल 110 जज हैं. इन जजों के भरोसे ये 12 लाख पेंडिंग केस हैं. केस निपटाने को लेकर जजों पर प्रेशर भी है. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत केसों की पेंडिंसि खत्म...
छह साल तक फैसला न सुनाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, इलाहाबाद हाइकोर्ट से तीन मामले अपने पास मंगाए
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By Swatantra Prabhat UP
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाइकोर्ट द्वारा छह साल तक फैसला सुरक्षित रखने के बावजूद निर्णय न सुनाए जाने पर कड़ा रुख अपनाते हुए तीन आपराधिक पुनर्विचार याचिकाएं अपने पास स्थानांतरित कर ली हैं। इन मामलों के लंबित रहने के कारण...

