जाति और भावनात्मक जहर पर बहस होती है

लालची नेता और बिकता पत्रकार,मिलकर कर रहे देश का बंटाधार

प्रतिक संघवी, राजकोट (गुजरात)     आजाद भारत की नींव जिन मूल्यों पर रखी गई थी, उनमें नेता और पत्रकार—दोनों को लोकतंत्र का स्तंभ माना गया था।नेता सत्ता में रहकर जनता की सेवा करेगा और पत्रकार सत्ता से टकराकर जनता की रक्षा...
संपादकीय  स्वतंत्र विचार