मेघा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन।

मेघा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन।

सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन सेवा एवं सामूहिक राष्ट्रगान के कार्यक्रम की समाप्ति हुई।


स्वतंत्र प्रभात 
 

अरविंद त्रिपाठी


शाहजहांपुर ।उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के निर्देशानुसार जनपद में पत्रकारों के विरुद्ध किए गए अपराधों में दडाभाव या दोषमुक्त पर रोक का अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आज तो तिवारी के संचालन में गांधी भवन में मेघा विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन सेवा एवं सामूहिक राष्ट्रगान के कार्यक्रम की समाप्ति हुई।


मेघा शिविर की अध्यक्षता प्रभारी न्यायाधीश अखिलेश कुमार पाठक ने की कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार राय उपस्थित थे।श्रोता के रूप में एस एस ला कालेज एवं आर्य महिला पीजी कॉलेज की छात्र छात्राएं अधिवक्ता गण एवं पत्रकार गण उपस्थित थे ।सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण आशुतोष तिवारी ने अपने उद्घाटन भाषण में बताया कि संयुक्त राज्य संघ ने वर्ष 2013 में अपने 68 में अधिवेशन में प्रत्येक 2 नवंबर को पत्रकारों के सम्मान में 

अधिवेशन बनाने का निर्णय लिया गया था। जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रों को पत्रकारों के विरुद्ध किए जा रहे अपराधियों के विरुद्ध जागरूक करना एवं सख्त कानून बनाने के लिए प्रेरित करना है ।उन्होंने कहा कि पिछले 14 वर्ष सेवारह  सौ से अधिक पत्रकारों की हत्या हुई है। एवं प्रतिवर्ष विश्व में औसतन 90 पत्रकारों की हत्या होती है। विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 180 देशों में भारत 142 वे स्थान पर है अर्थात भारत उन देशों में है। जहां पिछले कुछ वर्षों से प्रेस की स्वतंत्रता का लगातार उल्लंघन हुआ है एवं पत्रकारों के विरुद्ध हुए अपराध में पुलिस राजनीतिक दल एवं वरिष्ठ अधिकारीगण पर आरोप लगाए गए हैं। 

भारत में पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों में 10 में से 4 अपराध हत्या एवं आभार जैसे जघन्य अपराध एवं 10 में से नौ मामलों में अपराधी न्यायालय से दोषमुक्त होते हैं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के चलते निर्भीक पत्रकारिता में कमी आई है एवं पत्रकार तथा उनके परिवारी जन में पुलिस प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था में विश्वास लगाया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर होने वाले अपराध न सिर्फ पत्रकारों के परिवारी जन समाज को प्रभावित करते हैं। 

आप एक ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देती हैं क्योंकि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है ।अतः चाहे वह पुलिस प्रशासन या न्याय विभाग हो सभी को पत्रकारों के विरुद्ध हुए अपराधों में संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिए ।तभी जाकर हम प्रेस की स्वतंत्रता एवं मजबूत लोकतंत्र को सुनिश्चित कर सकते हैं ।जेल अधीक्षक जिला कारागार दें अपने अभिभाषण में कहा कि शासन एवं प्रशासन को पत्रकारों के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य करने हेतु एक स्वच्छंद एवं अपराध मुक्त माहौल देना संवैधानिक जिम्मेदारी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती आभा पाल ने कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता एक मूलभूत अधिकार है। 

जिससे किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने अपने अभिभाषण में कहा किस आसन पुलिस एवं न्यायिक अधिकारियों को मिलकर नियमित रूप से पत्रकारों को समर्पित एक जन सुनवाई करनी चाहिए ।ताकि पत्रकारों को त्वरित न्याय प्राप्त हो सके। जिला जज कोर्ट संख्या तीन एहसान हुसैन ने अपने संबोधन में कहा कि समय के साथ भारत में निर्मित पत्रकारिता में कमी आई है। 

जिस कारण पत्रकार एवं उनके परिवारी जन में पुलिस प्रशासन एवं न्याय व्यवस्था से विश्वास डगमगा गया है ।मुख्य विकास अधिकारी श्याम बहादुर सिंह ने अपने संबोधन में पत्रकारों की जनसुनवाई का समर्थन किया। पुलिस अधीक्षक आनंद ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारों के विरुद्ध किए गए अपराधों में दंडभाव की वजह की वजह निश्चित रूप से त्रुटिपूर्ण विवेचना एक प्रमुख कारण है। परंतु पुलिस अति मानव नहीं आई और जनता को पुलिस पर विश्वास करना चाहिए।

 और आगे बढ़कर सत्य बता कर आरोपी को दंड दिलाने में पुलिस की मदद करनी चाहिए। जिला अधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने  कहा कि पत्रकारों को संवैधानिक दायित्वों के दायरे में रहते हुए कार्य करना चाहिए। और आलोचना त्वं निर्णायक भूमिका अपनाने से बचना चाहिए। प्रभारी जनपद न्यायाधीश अखिलेश कुमार पाठक ने अपने भाषण में कहा कि न्यायपालिका पत्रकारों के विरुद्ध हुए अपराधों को बहुत गंभीरता से लेती है

 और अभिलंब विचार करके फैसला सुनाने का प्रयास करती है। अंत में पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार राय द्वारा अपने अनुमोदन में कहा गया कि पत्रकारों के विरुद्ध अपराधों को एक टीम वर्क की भावना अपनाने से रोका जा सकता है और इस टीम में पुलिस प्रशासन व न्याय व्यवस्था का बराबर योगदान है। इस टीम की एक भी कड़ी अपने दायित्वों के निर्वहन करने में असफल रहती है तो ऐसी टीम एक कमजोर टीम होगी एवं पत्रकार व उनके परिवारी जन को न्याय नहीं दिलाया जा सकेगा।


मेघा शिविर की अध्यक्षता प्रभारी न्यायाधीश अखिलेश कुमार पाठक ने की कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार राय , विशिष्ट अतिथि के रूप में जिला अधिकारी इंद्र विक्रम सिंह पुलिस अधीक्षक एस आनंद, मुख्य चिकित्सा अधिकारी ओपी गौतम, मुख्य विकास अधिकारी श्याम बहादुर सिंह ,नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ,मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती आभा पाल एवं जेल अधीक्षक डॉ बीडी पांडे, केंद्रीय बार के अध्यक्ष अनंत कुमार सिंह उपस्थित थे। 

उक्त कार्यक्रम में अपर जिला जज कोर्ट संख्या तीन आसान होता है अपर जिला जज कोर्ट संख्या 5 आलोक कुमार शुक्ला अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिनेश कुमार गौतम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आसमा सुल्ताना सिविल जज जुलकरनैन आलम सिविल जज मीनल चावला सिविल जज अरुणाजलि सिंह न्यायिक मजिस्ट्रेट उमाम जाहिद अपर सिविल जज सक्षम शेखर सिविल जज शिवानी सिंह अपर सिविल जज सुश्री नूतन सिविल जज एफटीसी आज न्यायिक अधिकारी गण जिला प्रोबेशन अधिकारी गौरव मिश्रा एवं यस यस कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ जयशंकर  भी उपस्थित थे।
 

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