आजादी के 75 वर्ष बाद भी गांव तक नहीं पहुंच पाती एम्बूलेन्स

आजादी के 75 वर्ष बाद भी गांव तक नहीं पहुंच पाती एम्बूलेन्स

आजादी के 75 वर्ष बाद भी गांव तक नहीं पहुंच पाती एम्बूलेन्स



चारपाई, रिक्सा,मोटरसाइकिल अथवा साइकिल पर लादकर एंबुलेंस तक लाना पड़ता है मरीज


शिवगढ़,रायबरेली। 

बछरावां विधानसभा क्षेत्र का एक ऐसा गांव जहां आजादी के 75 वर्ष बाद भी गांव तक एंबुलेंस और स्कूली साधन नहीं पहुंच पाते, जहाँ किसी के बीमार होने पर मरीजों को साइकिल,मोटरसाइकिल, साइकिल रिक्शा अथवा चारपाई पर लादकर एंबुलेंस तक पहुंचाना पड़ता है। 

वहीं छोटे-छोटे बच्चों को स्कूली वाहन गांव से आधा किलोमीटर पहले ही उतार देते हैं। हम बात कर रहे हैं बछरावां क्षेत्र के लक्ष्मनपुर मजरे असहन जगतपुर गांव की जहां आवागमन के लिए मुख्य रास्ता गूढ़ा रजबहा की कदम पुलिया से होकर जाता है जिससे दिन भर ग्रामीणों का आवागमन रहता है। वहीं आवागमन के लिए दो अन्य रास्ते हैं जो जर्जर होने के साथ ही करीब 4 किलोमीटर घूमकर गांव जाना पड़ता है। 

जिसके चलते इन रास्तों से एंबुलेंस गांव तक जाने के बजाए कदम पुलिया के पास ही जाकर खड़ी हो जाती हैं और मरीजों को चारपाई, साइकिल, मोटरसाइकिल, अथवा साइकिल रिक्शा पर लादकर एंबुलेंस तक लाना पड़ता है। वहीं स्कूली वाहन भी अन्य रास्तों के खराब होने एवं अधिक दूरी के चलते गांव जाने से इंकार कर देते हैं लिहाजा कदम पुलिया से होकर ही स्कूली छात्रों को पैदल गुजरना पड़ता है। 

सबसे बड़ी समस्या है कि साइकिल रिक्शा पर पुआल, सरसों अथवा अन्य बोझा लादकर कदम पुलिया से गुजरने पर रिक्शा कदम पुलिया में फंस जाता है और सरसों अथवा पुआल के बोझ सिर पर लादकर पुलिया पार करना पड़ता है। लम्बे समय से कदम पुलिया के स्थान पर पुल बनवाए जाने की मांग के बावजूद आज तक गूढ़ा राजबहा पर पुल का निर्माण ना होने से ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।

 शुक्रवार को ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग शारदा सहायक खण्ड लखनऊ के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कदम पुलिया के स्थान पर पुल बनवाए जाने की मांग की है। इस मौके पर ओम प्रकाश रावत, राहुल, पंकज रावत, अशर्फीलाल,सकील अहमद,बच्चूलाल,मातादीन, राजेश कुमार,रामनरेश,रामसमुझ,सर्वेश कुमार ,अजय कुमार,मातादीन आदि लोग मौजूद रहे।
 

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