अवैध कब्जा हटाने में एलडीए अधिकारियों की हीलाहवाली

अवैध कब्जा हटाने में एलडीए अधिकारियों की हीलाहवाली

अवैध कब्जा हटाने में एलडीए अधिकारियों की हीलाहवाली


जेई जाकिर अली शिकायतों का निस्तारण करने के बजाए कोर्ट जाने की दे रहे सलाह

राहगीरों की नहीं सुनी एलडीए ने सुनवाई अब न्यायालय की बचा सहारा का जरिया

लखनऊ।

लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी व कर्मचारी सार्वजनिक व निजी जमीनों पर अतिक्रमण तथा अवैध कब्जा हटाने में रुचि नहीं लेते। पीड़ित की ओर से बार-बार शिकायत करने पर अधिकारी मामले का निस्तारण करने के बजाए उसे न्यायालय से निस्तारण कराने की रिपोर्ट लगाकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। इससे प्रदेश सरकार की ओर से संचालित एंटी भूमाफिया व अतिक्रमण विरोधी अभियान की हवा निकल रही है।

जी हां या मामला उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एलडीए  प्रियदर्शनी कॉलोनी का है जी हां बता दें कि कॉलोनी नंबर L1/312 निवासी कमलेश वर्मा जो की सरकारी अध्यापक अपने धन के रूप के आगे किसी को नहीं समझते और आंखों की मनमानी खूब बढ़ावा देकर जिला प्रशासन को एलडीए विभाग को चैलेंज देने का काम कर रहे हैं जी हां बता दें कि बेखौफ कमलेश वर्मा कॉर्नर की मकान की आड़ में डेढ़ से दो फीट नाली की जगह में अवैध कब्जा कर अपनी 3 मंजिला इमारत खड़ा कर प्रशासन की आंखों में धूल झोंक रहे हैं और प्रशासन है कि अपने मंसूबों में नाकामयाब होता नजर आ रहा है।

लखनऊ विकास प्राधिकरण अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली

बता देगी इस परेशानी से जूझ रहे हैं स्थानीय निवासी लखनऊ विकास प्राधिकरण अधिकारियों से मिलकर समस्या बताने के बावजूद इसके समस्याओं से निजात अभी तक नहीं मिली इस मुद्दे पर लखनऊ विकास प्राधिकरण महासचिव पवन गंगवार ओ जी अरुण कुमार व जय संजय शुक्ला समेत अन्य अधिकारियों के मामला संज्ञान में डाला गया बावजूद इसके टालमटोल कर मामला वहीं जस का तस है अब देखना यह है कि न्यायालय इस मामले को लेकर क्या कोई गंभीर कदम उठाता है जनता को न्याय देने हेतु क्या ठोस कदम उठाता है

एलडीए कोर्ट में चल रहा विवाद

यह तब है जब की इस कॉलोनी का एलडीए कोर्ट में विवाद चल रहा है बावजूद इसके प्रदेश की सरकार ने सार्वजनिक व निजी जमीनों से अतिक्रमण व अवैध कब्जा हटाने के लिए आगे आने की वजह कदम पीछे खींचने नजर आ रहे हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले में अतिक्रमण विरोधी दस्ता गठित करने का भी फरमान जारी किया गया। सरकार ने यह भी निर्देश दिया कि किसी के निजी जमीन पर दबंगों की ओर से किए अवैध कब्जे में हटाने के लिए भी कार्रवाई की जाए। 

लेकिन आलम ये है कि जिले में अतिक्रमण हटाने व निजी व सार्वजनिक जमीनों पर से अवैध कब्जा हटवाने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इतना ही नहीं शिकायत करने के बाद भी अधिकारियों ने इसको लेकर टाल मटोल करने का काम किया और बार-बार शिकायत मिलने पर इसके लिए न्यायालय में वाद दाखिल कर इसका निस्तारण कराने का सुझाव देते हुए इस तरह के प्रकरणों को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
 

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