हाथवानी में सिस्टम की भेंट चढ़ी लाखों की लागत से लगा सौर ऊर्जा टंकी ,प्यासे राहगीर
प्यासे राहगीर प्रशासन मौन, हाथवानी में महीनों से खराब पड़ी पानी की टंकी खोल रही विकास की पोल
अजित सिंह / राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
प्रदेश का वह जिला जो अपने खनिज और भारी राजस्व के लिए प्रदेश में दूसरे पायदान पर खड़ा है, आज वह अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए सिसक रहा है। जनपद के हाथीनाला क्षेत्र स्थित हाथवानी से विकास के दावों की पोल खोलने वाली एक गंभीर तस्वीर सामने आई है, जहाँ सरकारी धन के सदुपयोग पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाथवानी में हनुमान मंदिर के पीछे, दुद्धी-विंधमगंज मार्ग पर स्थित सौर ऊर्जा संचालित पानी की टंकी पिछले कई महीनों से सफेद हाथी साबित हो रही है। जानकारी के अनुसार सरकार ने जनता की सुविधा के लिए लगभग 1 लाख रुपये की लागत से इस टैंक का निर्माण कराया था। विडंबना देखिए कि महज 3 साल पहले बनी यह टंकी आज देख-रेख के अभाव में दम तोड़ चुकी है। स्थानीय निवासी इसे जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी और प्रशासनिक लापरवाही का जीवंत प्रमाण मान रहे हैं।
यह क्षेत्र भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। यह मार्ग उत्तर प्रदेश को झारखंड और बिहार की सीमाओं से जोड़ता है। हाथीनाला बस स्टैंड पर प्रतिदिन सैकड़ों यात्री उतरते हैं। चिलचिलाती धूप और लंबी यात्रा की थकान के बाद जब यात्री पानी की उम्मीद में इस टंकी की ओर बढ़ते हैं, तो उन्हें केवल सूखा नल और मायूसी हाथ लगती है। क्षेत्र के ग्रामीणों और दुकानदारों का गुस्सा स्थानीय ग्राम प्रधान आनंद यादव के खिलाफ चरम पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि समस्या की कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन समाधान शून्य रहा। स्थानीय दुकानदारों ने यहाँ तक पेशकश की कि मरम्मत का खर्च वे स्वयं वहन कर लेंगे, फिर भी प्रधान प्रशासन ने कोई रुचि नहीं दिखाई। प्रधान की इस चुप्पी को स्थानीय लोग विकास के प्रति उनकी उदासीनता और तानाशाही रवैया करार दे रहे हैं।
प्रधान का पद जनता की सेवा के लिए होता है, लेकिन यहाँ जनता की समस्या को अनदेखा करना ही नीति बन गई है। लाखों कि लागत से बनी लगाई गई टंकी आज भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिख रही है। स्थानीय निवासियों व बुद्धिजीवियों का मानना है कि एक ओर सरकार हर घर नल और जल जीवन मिशन जैसे अभियानों पर करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर हाथवानी जैसी स्थितियाँ सरकार की साख को बट्टा लगा रही हैं।
लाखों रुपये के सरकारी निवेश का 3 साल में ही बेकार हो जाना सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है। हाथवानी के निवासियों ने अब जिलाधिकारी (DM) सोनभद्र और जिला प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ग्रामीणों का स्पष्ट सवाल है: क्या सरकारी संपत्ति केवल कागजों पर विकास दिखाने के लिए है। क्षेत्र की मांग है कि इस पानी की टंकी को तत्काल प्रभाव से ठीक कराया जाए ताकि राहगीरों और दुकानदारों को इस मानवीय संकट से निजात मिल सके।

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