ओबरा तापीय परियोजना विस्तारीकरण आशियाना बचाने की गुहार के साथ सड़कों पर उतरा जनमानस
झुग्गी झोपड़ी हटाने को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन
अजित सिंह/ राजेश तिवारी ( ब्यूरो रिपोर्ट)
सोनभद्र (ओबरा) / उत्तर प्रदेश-
उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण ओबरा तापीय परियोजना के विस्तारीकरण की सुगबुगाहट के बीच अब वहां दशकों से रह रहे गरीबों और श्रमिकों के अस्तित्व पर संकट मंडराने लगा है। परियोजना क्षेत्र से बेदखल किए जाने के नोटिस और अल्टीमेटम के विरोध में संविदा सफाई कर्मियों, नगर पंचायत कर्मियों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवारों ने एक विशाल शांतिपूर्ण जनसंपर्क यात्रा निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया।
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परियोजना परिसर में पिछले 35 से 40 वर्षों से निवास कर रहे इन परिवारों का दर्द अब सड़कों पर छलक आया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी दो-तीन पीढ़ियां इसी परियोजना की सेवा में खप गईं। इनमें से अधिकांश लोग न्यूनतम मजदूरी से भी कम वेतन पर काम कर रहे हैं, जो ओबरा तापीय परियोजना और उससे जुड़े अधिकारियों व कर्मियों की सेवा में निरंतर लगे रहे। जनसंपर्क यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
निवासियों के अनुसार, लगभग दो वर्ष पहले उन्हें लिखित आश्वासन दिया गया था कि सरकार की मंशा के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को चिन्हित किया जाएगा। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना या अन्य सरकारी योजनाओं के तहत स्थाई रूप से बसाने का वादा किया गया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अब इन आश्वासनों को दरकिनार कर उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उजाड़ने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है। यात्रा में शामिल संविदा कर्मियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि उनकी मजदूरी इतनी कम है कि वे बमुश्किल अपने बच्चों की शिक्षा और परिवार का भरण-पोषण कर पा रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि उन्हें उनके घरों से बेदखल किया गया, तो हजारों की संख्या में लोग सड़क पर आ जाएंगे।
हम परियोजना के लिए दिन-रात पसीना बहाते हैं, लेकिन आज जब विस्तारीकरण की बात आई तो हमें ही सबसे पहले बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। हमारे पास नई जमीन खरीदने या घर बनाने के लिए संसाधन नहीं हैं। एक प्रदर्शनकारी श्रमिक इस शांतिपूर्ण यात्रा के माध्यम से गरीब जनमानस ने एकजुटता का परिचय दिया है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं किया गया, तो वे जल्द ही एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ जिलाधिकारी (DM) और मुख्यमंत्री (CM) के समक्ष उपस्थित होकर अपनी पीड़ा साझा करेंगे।

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