स्कूल के दिनों से ही टॉपर रहीं श्रद्धा
लॉ की पढ़ाई में भी हासिल किया गोल्ड मेडल
स्कूल के बाद श्रद्धा ने कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) में टॉप रैंक हासिल की और बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) में दाखिला लिया। यहां भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। पढ़ाई पूरी करने पर उन्हें अपने कॉन्वोकेशन में तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा के हाथों गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
कॉरपोरेट करियर छोड़ चुनी देश सेवा की राह
लॉ की पढ़ाई के बाद श्रद्धा का चयन हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) में हुआ, जहां उन्होंने यूनिलीवर फ्यूचर लीडर्स प्रोग्राम के तहत लंदन और मुंबई में लीगल मैनेजर के रूप में काम किया। एक सुरक्षित और शानदार कॉरपोरेट करियर के बावजूद उनके मन में देश सेवा की इच्छा बनी रही। इसी सोच के साथ उन्होंने नौकरी छोड़कर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की।
बिना कोचिंग, सेल्फ-स्टडी से UPSC की तैयारी
श्रद्धा गोमे ने यूपीएससी में लॉ को अपना वैकल्पिक विषय चुना और बिना किसी कोचिंग के पूरी तरह सेल्फ-स्टडी पर भरोसा किया। उन्होंने रोजाना करीब 9 से 10 घंटे पढ़ाई की और नियमितता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। सही रणनीति और आत्मअनुशासन के दम पर उन्होंने वर्ष 2021 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली और ऑल इंडिया रैंक 60 हासिल कर आईएएस अधिकारी बनीं।
पढ़ाई के साथ बनाए रखा जीवन का संतुलन
श्रद्धा की सफलता का एक अहम पहलू उनका संतुलित जीवन है। तैयारी के दौरान उन्होंने खुद को पूरी तरह सामाजिक जीवन से अलग नहीं किया। वे फिल्में देखती थीं, किताबें पढ़ती थीं, बैडमिंटन खेलती थीं और परिवार के साथ समय बिताती थीं। हालांकि, पढ़ाई के समय उनका पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर रहता था—न मोबाइल, न टीवी और न ही कोई दूसरी बाधा।
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आईएएस श्रद्धा गोमे की कहानी यह साबित करती है कि प्रतिभा, कड़ी मेहनत और सही टाइम मैनेजमेंट के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनका सफर उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।


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