Haryana: हरियाणा में नगर निगम का क्लर्क गिरफ्तार, 6 महीने से रिश्वत मामले में था फरार
वीडियो सामने आने के बाद से था फरार
रिश्वत लेते हुए वीडियो सामने आने के बाद से ही क्लर्क हरिओम कार्यालय से गैरहाजिर हो गया था। नगर निगम की ओर से उसे लगातार नोटिस भेजे गए, लेकिन वह पेश नहीं हुआ। अधिकारियों के अनुसार, हरिओम ने बहाना बनाया कि उसे वह वीडियो नहीं मिली है, जबकि वीडियो उसे वॉट्सऐप पर भेजी जा चुकी थी। तीन नोटिसों का कोई जवाब न देने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया।
दो महीने भटकाया, रिश्वत मिलते ही एक दिन में काम
मोहन नगर निवासी विनोद और उनके भतीजे रोहित ने बताया कि उनके 211 गज के प्लॉट की प्रॉपर्टी आईडी में गलती से पड़ोसी की जमीन दर्शा दी गई थी। इस गलती को ठीक कराने के लिए वे करीब दो महीने तक नगर निगम के चक्कर काटते रहे, लेकिन हर बार उन्हें किसी न किसी कागज की कमी बताकर टाल दिया जाता था।
आखिरकार एक चपरासी के कहने पर उनकी मुलाकात नगर निगम के क्लर्क हरिओम से हुई। आरोप है कि 7 मई को डिप्टी मेयर मंजीत गहलावत के कार्यालय (कमरा नंबर-8) में हरिओम ने उनसे 15 हजार रुपये की रिश्वत ली। पीड़ित ने पूरी घटना की गुप्त रूप से वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली।
डिप्टी मेयर के कार्यालय में ली रिश्वत
शिकायतकर्ता विनोद के अनुसार, तय समय पर वह और उसका भतीजा डिप्टी मेयर के कार्यालय पहुंचे। वहां हरिओम ने 15 हजार रुपये गिनकर अपनी जेब में रख लिए। जब विनोद ने पूछा कि प्रॉपर्टी आईडी कब तक ठीक होगी, तो क्लर्क ने कहा कि शाम 4:30 बजे तक आईडी मिल जाएगी। उसने यह भी कहा कि “अब आपसे ज्यादा कोशिश मैं करूंगा।”
रिश्वत देने के अगले ही दिन लंबे समय से लंबित प्रॉपर्टी आईडी को ठीक कर दिया गया, जबकि इससे पहले दो महीने तक फाइल जानबूझकर लटकाई गई थी।
निगम में है फ्री ऑनलाइन प्रक्रिया, फिर भी होती है वसूली
नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक, प्रॉपर्टी आईडी से जुड़ी किसी भी समस्या के समाधान के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। इसके लिए निगम में हेल्प डेस्क बनाई गई है, जहां सभी सेवाएं निशुल्क हैं। नियमों के अनुसार 2 से 15 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए और इस पर अधिकारियों की निगरानी भी रहती है।
इसके बावजूद आरोप है कि जानबूझकर फाइलों को बार-बार अलग-अलग कारणों से रिजेक्ट किया जाता है, ताकि आम व्यक्ति परेशान होकर रिश्वत देने को मजबूर हो जाए।
सिर्फ हरिओम ही नहीं, नेटवर्क पर भी सवाल
नगर निगम कमिश्नर ने जांच के बाद हरिओम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर दी थी, लेकिन इस मामले ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रॉपर्टी आईडी सुधार जैसे मामलों में कई कर्मचारियों की भूमिका होती है, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हरिओम अकेला था या इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम कर रहा था।
कोर्ट में पेश कर रिमांड की तैयारी
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद अब क्लर्क हरिओम को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस पूछताछ के लिए रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रिश्वतखोरी में और कौन-कौन लोग शामिल थे। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है।


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